Iran-US War: Hormuz पर Iran की America को खुली चुनौती

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होर्मुज़ स्ट्रेट पर ईरान-अमेरिका में नया टकराव

दुनिया के नक्शे पर होर्मुज़ की चौड़ाई भले सीमित हो…लेकिन इसकी अहमियत बेहद बड़ी है। फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला ये समुद्री रास्ता दुनिया के ऊर्जा कारोबार की सबसे महत्वपूर्ण लाइनों में से एक है। और अब इसी होर्मुज़ को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच नया टकराव सामने आया है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका उसकी शर्तों को स्वीकार नहीं करता, तब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ पूरी तरह नहीं खोला जाएगा।

ईरान ने अमेरिका के सामने रखीं ये मांगें

दरअसल ईरान ने सोमवार को साफ कर दिया कि अमेरिका की शर्तें पूरी होने तक वह होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा नहीं खोलेगा। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने कहा कि अब अमेरिका को अपने गैरकानूनी और विनाशकारी कदम रोकने और उनकी भरपाई करने की जरूरत है। उन्होंने ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकाबंदी का भी जिक्र किया।

ईरान की मांग है कि अमेरिका नाकाबंदी हटाए, कई महीनों के युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा दे, आर्थिक प्रतिबंध हटाए और ईरान की जब्त संपत्तियों को जारी करे। होर्मुज स्ट्रेट का बंद होना युद्ध का सबसे लंबे समय तक चलने वाला असर बन गया है। सामान्य स्थिति में दुनिया के करीब पांचवें हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है। इसके चलते एनर्जी की कीमतें अमेरिका की राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बनी हुई हैं, खासकर नवंबर में होने वाले मिड टर्म चुनावों से पहले।

ईरान और ओमान के बीच भी चल रही बातचीत

इधर ईरान ओमान के साथ भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आवाजाही को लेकर अलग से बातचीत कर रहा है। इसमें कुछ समय के लिए जहाजों की आवाजाही के लिए एक सुरक्षित रास्ता बनाने की संभावना भी शामिल है। हालांकि, ईरान ने कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह खोलने का फैसला अमेरिका के साथ बातचीत पर निर्भर करेगा।

दरअसल ईरान ने 28 फरवरी को होर्मुज पर अपना कंट्रोल बढ़ाया था। इसके तहत इजरायल और अमेरिका से जुड़े या उनके सहयोगी जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने पर रोक लगा दी गई थी। जून में ईरान और अमेरिका ने लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करने को लेकर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। दोनों देशों को अंतिम समझौते के लिए 60 दिनों के भीतर बातचीत करनी थी, लेकिन क्षेत्र में बढ़े तनाव के कारण इन वार्ताओं का भविष्य अनिश्चित हो गया है। ईरान और ओमान पिछले कुछ हफ्तों से स्ट्रेट में समुद्री यातायात के लिए नए सुरक्षित मार्ग को लेकर बातचीत कर रहे हैं।

होर्मुज़ को दबाव के हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा ईरान?

दरअसल ईरान और अमेरिका की इस जंग में दुनिया का सबसे बड़ा तेल सप्लाई रूट स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह पिसकर रह गया है। समंदर में सैकड़ों जहाजों की लंबी कतारें लगी हैं… लेकिन आगे सिर्फ अंधेरा ही अंधेरा है। ईरान इस रास्ते को अमेरिका पर दबाव बनाने के लिए एक बड़े हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है। ट्रंप ने इसे छुड़ाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन उनकी सारी चालें फुस्स साबित हुईं। अब मजबूरन ओमान को टेबल पर बिठाया गया है।

इस बातचीत से कुछ पॉजिटिव संकेत तो मिले हैं, लेकिन पेंच यहां फंसा है कि ईरान ने रास्ता खोलने के बदले 3 बड़ी शर्तें रख दी हैं।

ईरान की 3 बड़ी शर्तें: टोल टैक्स, ट्रैफिक कंट्रोल और जहाजों पर बैन

  • 5 से 7% टोल टैक्स: होर्मुज से गुजरने वाले हर कमर्शियल और कार्गो जहाज से उसके माल की कुल कीमत का 5 से 7 प्रतिशत शुल्क वसूलने की मांग।
  • ट्रैफिक कंट्रोल का अधिकार: कौन सा जहाज होर्मुज से गुजरेगा और किसे रोका जाएगा, इसका कानूनी और सैन्य अधिकार तेहरान के पास रखने की मांग।
  • दुश्मन देशों के जहाजों पर बैन: अमेरिका, इजरायल या ईरान विरोधी रुख रखने वाले देशों के जहाजों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगाने का प्रस्ताव।

होर्मुज़ का भूगोल और दुनिया के लिए इसकी अहमियत

दरअसल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का भूगोल बहुत दिलचस्प है। इसके एक तरफ ओमान और संयुक्त अरब अमीरात की सीमाएं लगती हैं तो दूसरी तरफ ईरान का विशाल समुद्री तट है। ये वो बेहद अहम समुद्री गलियारा है जहां से सामान्य दिनों में दुनिया के कुल कच्चे तेल और LNG की सप्लाई का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है।

फरवरी से अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुई जंग के बाद से ये रास्ता पूरी तरह से जंग का अखाड़ा बना हुआ है। ईरान की नाकेबंदी और हमलों की वजह से वैश्विक एनर्जी सप्लाई चेन बुरी तरह चरमरा गई है।

ओमान निकाल रहा है बीच का रास्ता

इधर ओमान इस पूरे विवाद में शांतिदूत और मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। ओमान का सुझाव है कि जहाजों पर 3 प्रतिशत के आसपास शुल्क तय कर दिया जाए। इससे रास्ता भी खुल जाएगा, व्यापार भी शुरू होगा और ईरान का मान-सम्मान भी रह जाएगा।

वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भले ही कई मंचों से कह रहे हों कि डील बिल्कुल करीब है, लेकिन व्हाइट हाउस और पेंटागन के अधिकारी किसी भी सूरत में ईरान को टोल टैक्स देने या इस व्यापारिक रास्ते की चाबी सौंपने को तैयार नहीं हैं। वाशिंगटन का स्पष्ट रुख है कि दुनिया की लाइफलाइन माने जाने वाले इस एनर्जी रूट पर ईरान का एकाधिकार किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं किया जाएगा।

क्या अमेरिका ईरान की शर्तें मानेगा?

ईरान फिलहाल अपनी रणनीति से पीछे हटता दिखाई नहीं दे रहा। तेहरान एक तरफ ओमान के साथ सुरक्षित शिपिंग व्यवस्था पर बातचीत आगे बढ़ा रहा है, तो दूसरी तरफ अमेरिका के सामने अपनी शर्तों को लेकर सख्त रुख बनाए हुए है।

यानी ईरान का संदेश है—सीमित रास्ता खुल सकता है, लेकिन पूरा होर्मुज़ तभी खुलेगा जब हमारी शर्तें पूरी होंगी। अब सबसे बड़ा सवाल है…क्या अमेरिका ईरान की इन शर्तों को मानेगा? या फिर वॉशिंगटन दबाव बढ़ाने की रणनीति जारी रखेगा?

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