608 KM ट्रैक पर लगेगा रेलवे कवच 4.0, टक्कर रोकने के लिए रेलवे का बड़ा सेफ्टी प्लान

608 किलोमीटर ट्रैक पर रेलवे कवच सिस्टम लगाने की योजना

608 किलोमीटर ट्रैक पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी

नई दिल्ली: भारतीय रेलवे यात्रियों की सुरक्षा और ट्रेनों के संचालन को बेहतर बनाने के लिए कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। अलग-अलग जोन और डिवीजन में कवच 4.0, इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग, इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम और 4-लेन रोड ओवरब्रिज समेत कई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य ट्रेनों को ज्यादा सुरक्षित बनाना, एक-दूसरे से टकराने वाले ट्रेन मूवमेंट को रोकना, सिग्नलिंग सिस्टम को मजबूत करना और रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना है। इस योजना के तहत 608 किलोमीटर ट्रैक पर कवच लगाए जाने की जानकारी दी गई है।

कवच भारत में विकसित ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम

रेलवे कवच भारत में विकसित ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है। इसका उद्देश्य ट्रेनों को टक्कर से बचाना और रेड सिग्नल पार करने जैसी स्थिति में सुरक्षा प्रदान करना है। जरूरत पड़ने पर यह सिस्टम अपने आप ब्रेक लगाने में भी मदद कर सकता है। इस तकनीक का उद्देश्य ट्रेन संचालन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है। रेलवे नेटवर्क में ट्रेन मूवमेंट को नियंत्रित करने के लिए सिग्नलिंग और ट्रैक से जुड़ी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। कवच सिस्टम के साथ इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग को भी मजबूत किया जा रहा है। कंप्यूटर आधारित यह सिस्टम सिग्नल और ट्रैक के पॉइंट्स को नियंत्रित करने में मदद करता है, जिससे ट्रेन संचालन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बेहतर की जा सके।

इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम की भूमिका

इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम रेलवे की सिग्नलिंग व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह कंप्यूटर आधारित प्रणाली सिग्नल और ट्रैक के पॉइंट्स को नियंत्रित करने में मदद करती है। रेलवे की योजना में आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम को मजबूत करने के साथ ट्रैक और संचालन से जुड़ी दूसरी व्यवस्थाओं को भी अपग्रेड किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ट्रेनों के संचालन को सुरक्षित बनाने के साथ रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना भी है। रेलवे के मुताबिक आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम से डिवीजन में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी। इसके अलावा ट्रैक्शन सिस्टम की क्षमता बढ़ने से संबंधित सेक्शन पर बढ़ते रेल संचालन को भी सपोर्ट करने में मदद मिलेगी।

इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम और दूसरे प्रोजेक्ट

रेलवे की योजनाओं में इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम को अपग्रेड करने का काम भी शामिल है। अलग-अलग रेल जोन और डिवीजन में इसके लिए परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।

साउथ कोस्ट रेलवे के सावल्यापुरम-गुंटूर सेक्शन में इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन से जुड़ा काम शामिल है। इस सेक्शन पर इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन के लिए व्यवस्था को आगे बढ़ाया जाएगा। इसी तरह वेस्टर्न रेलवे के उधना-उकाई सेक्शन के सोनगढ़ हिस्से में लेवल क्रॉसिंग नंबर 2 की जगह 4-लेन रोड ओवरब्रिज बनाने की परियोजना को भी मंजूरी दी गई है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 133.2295 करोड़ रुपये बताई गई है। करीब 73 किलोमीटर के रूट से जुड़े इस हिस्से में परियोजना के जरिए रेलवे और सड़क यातायात की व्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रयास है।

रेलवे नेटवर्क की क्षमता और सुरक्षा दोनों पर जोर

रेलवे के अलग-अलग प्रोजेक्ट सिर्फ ट्रेनों की सुरक्षा तक सीमित नहीं हैं। इनमें सिग्नलिंग, ट्रैक, इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन और सड़क-रेल संपर्क से जुड़ी परियोजनाएं भी शामिल हैं। रेलवे कवच को 608 किलोमीटर ट्रैक पर लगाने की योजना के साथ आधुनिक सिग्नलिंग और इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग को मजबूत करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इससे ट्रेन संचालन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने का लक्ष्य है। रेलवे द्वारा मंजूर किए गए प्रोजेक्ट में यात्रियों की सुरक्षा के साथ रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने और अलग-अलग सेक्शन में बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। कवच, इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग और इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन जैसी व्यवस्थाओं को साथ लेकर रेलवे अपने संचालन तंत्र को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

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