सुप्रीम कोर्ट चुनाव-आयुक्तों की नियुक्ति वाले फैसले की जांच करेगा
सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का मामला
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार के फैसले की न्यायिक जांच की दिशा में कदम बढ़ाया है। मामला चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून और उस प्रक्रिया को लेकर है, जिसके तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की जाती है। याचिका में केंद्र सरकार की ओर से की गई नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।
अदालत के सामने यह मुद्दा भी है कि चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थान में नियुक्तियों को किस प्रक्रिया के तहत किया जाना चाहिए। चुनाव आयुक्त नियुक्ति से जुड़े इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी चुनाव आयोग के फैसलों और उसके सदस्यों के बीच निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं। अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग के फैसले सर्वसम्मति या बहुमत के आधार पर होने चाहिए। तीन सदस्यीय आयोग में किसी एक सदस्य का अकेला फैसला पूरे आयोग का फैसला नहीं माना जा सकता।
याचिका में केंद्र सरकार के फैसले पर सवाल
इस मामले में वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन की ओर से याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार के फैसले पर सवाल उठाया गया है। मामले में कहा गया है कि नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े निर्णयों में संसद की भूमिका और निर्धारित कानूनी व्यवस्था को ध्यान में रखा जाना चाहिए। स्रोत के अनुसार वर्ष 2023 के बाद चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए संसद ने नया कानून बनाया था। इसके तहत तीन सदस्यीय चयन समिति के गठन का प्रावधान किया गया।
समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं। इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी से नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी होती है। याचिका में इसी व्यवस्था और उससे जुड़े निर्णयों की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। चुनाव आयुक्त नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई में अदालत इस बात की भी जांच करेगी कि संबंधित फैसले कानूनी और संवैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप लिए गए थे या नहीं।
बड़ी बेंच को मामला भेजने पर भी विचार
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान बड़ी बेंच के पास भेजने के मुद्दे पर भी विचार किया। अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग के सदस्यों की नियुक्ति और उससे जुड़े कानूनी प्रावधानों की संवैधानिक स्थिति महत्वपूर्ण है। अदालत के सामने यह सवाल भी है कि केंद्र सरकार द्वारा नियुक्ति से जुड़े फैसले किस तरह लिए गए और क्या उनमें निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ। इससे पहले भी अदालत ने कहा है कि चुनाव आयोग के फैसले सर्वसम्मति या बहुमत के आधार पर लिए जाने चाहिए।
चुनाव आयुक्त नियुक्ति से जुड़े इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले का चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल अदालत ने मामले से जुड़े पक्षों की दलीलें सुनी हैं और आगे की सुनवाई में कानूनी तथा संवैधानिक पहलुओं की जांच की जाएगी। मामले में केंद्र सरकार और संबंधित पक्षों का जवाब भी महत्वपूर्ण होगा, जिसके आधार पर अदालत आगे की कार्रवाई तय करेगी।
