इटली के स्कूलों में बुर्का-नकाब पर लगेगा बैन, विदेशी छात्रों की संख्या सीमित करने की भी तैयारी
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने स्कूलों में बुर्का और नकाब पर रोक लगाने की योजना का ऐलान किया है। इसके साथ ही स्कूलों में विदेशी छात्रों की संख्या सीमित रखने की भी योजना सामने आई है। प्रस्तावित नियमों के तहत उन विदेशी छात्रों के माता-पिता को इतालवी भाषा सीखनी होगी, जिनके बच्चों को स्कूल में घुलने-मिलने और इटली की शिक्षा व्यवस्था में शामिल होने में गंभीर दिक्कत हो रही है। इस प्रस्ताव को लेकर इटली में स्कूल, इमिग्रेशन और सार्वजनिक जीवन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा तेज हुई है।
मेलोनी सरकार स्कूलों में बुर्का और नकाब पर अलग से रोक लगाने की तैयारी कर रही है। मेलोनी ने कहा है कि स्कूलों में चेहरा ढका नहीं होना चाहिए और किसी व्यक्ति पर परंपरा के नाम पर चेहरा ढकने का दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए। इसके अलावा, सरकार स्कूलों में विदेशी छात्रों की संख्या सीमित करने की योजना पर भी काम कर रही है। इस प्रस्तावित व्यवस्था के तहत कुछ विदेशी छात्रों के माता-पिता के लिए इतालवी भाषा सीखने की शर्त रखी जाएगी।
दुनिया के 24 देशों में सार्वजनिक जगहों पर अलग-अलग प्रतिबंध
इटली में बुर्का नकाब पर प्रस्तावित रोक के संदर्भ में रिपोर्ट में बताया गया है कि इटली ऐसा कदम उठाने वाला पहला देश नहीं होगा। फ्रांस और चीन समेत दुनिया के करीब 24 देशों में सार्वजनिक जगहों पर चेहरा पूरी तरह ढकने वाले कपड़ों पर अलग-अलग तरह की पाबंदियां लागू हैं। इटली में चेहरा ढकने को लेकर 1975 से कानून मौजूद है। इसके तहत सार्वजनिक जगहों पर इस तरह चेहरा ढकना मना है, जिससे किसी व्यक्ति की पहचान न हो सके। हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में छूट भी दी जा सकती है।
इटली में चेहरा ढकने से जुड़े नियमों को लेकर 2008 के एक कोर्ट फैसले का भी उल्लेख किया गया है। इस फैसले में कहा गया था कि अगर कोई व्यक्ति धार्मिक या सांस्कृतिक वजह से चेहरा ढकता है, तो केवल इसी वजह से उसे कानून तोड़ने वाला नहीं माना जाएगा। यानी मामले की परिस्थितियों को भी देखा जाएगा। अब मेलोनी सरकार स्कूलों में बुर्का और नकाब पर अलग से रोक लगाने की तैयारी कर रही है, इसलिए प्रस्तावित स्कूल नियम पहले से मौजूद सार्वजनिक जगहों के नियमों से अलग विषय के रूप में सामने आ रहे हैं।
प्रस्ताव को संसद से मंजूरी जरूरी होगी
सरकार की मंजूरी के बाद इस प्रस्ताव को कानून बनाने के लिए संसद में भेजा जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, इसे 60 दिनों के भीतर संसद से मंजूरी मिलना जरूरी होगा। इसके बाद स्कूलों में बुर्का और नकाब को लेकर अलग नियम लागू किए जा सकेंगे। इस पूरी प्रक्रिया में सरकार की मंजूरी, संसद की मंजूरी और प्रस्तावित नियमों का लागू होना महत्वपूर्ण चरण होंगे।
इटली में अगले साल 2027 में आम चुनाव होने हैं। वहीं, इमिग्रेशन यानी दूसरे देशों से आने वाले लोगों का मुद्दा वहां पहले से ही बड़ा राजनीतिक मुद्दा है। मेलोनी की पार्टी ब्रदर्स ऑफ इटली को नेशनल फ्यूचर यानी FN से चुनौती मिल रही है। रिपोर्ट के अनुसार, यह पार्टी मेलोनी की पार्टी से भी ज्यादा सख्त इमिग्रेशन नीति की मांग करती है। FN ने इसी साल जुलाई में स्कूलों में बुर्का और नकाब पर रोक लगाने की मांग की थी। इसलिए अब मेलोनी सरकार जिस मुद्दे पर कानून लाने की तैयारी कर रही है, उस पर राजनीतिक दबाव और बहस दोनों मौजूद हैं।
यूरोपियन कोर्ट के फैसलों का भी उल्लेख
रिपोर्ट में यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स के फ्रांस और बेल्जियम से जुड़े फैसलों का भी उल्लेख किया गया है। फ्रांस में 2014 और बेल्जियम में 2017 के फैसले में अदालत ने सार्वजनिक जगहों पर बुर्का-नकाब पर रोक को सही ठहराया था। अदालत के फैसलों में लोगों के बीच मेलजोल बनाए रखने को ऐसी रोक का एक आधार माना गया था। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र ने इस तरह की पाबंदियों का विरोध किया है। इस प्रकार इस मुद्दे पर कानूनी दृष्टिकोण के साथ मानवाधिकार से जुड़ी आपत्तियां भी सामने आई हैं।
रिसर्च इंस्टीट्यूट फोंडाजियोने आईएसएमयू के मुताबिक, इटली के स्कूलों में करीब 9.3 लाख ऐसे छात्र पढ़ते हैं, जिनके पास इटली की नागरिकता नहीं है। रिपोर्ट में बताया गया है कि स्कूलों में पढ़ने वाले हर 100 छात्रों में करीब 12 विदेशी नागरिकता वाले छात्र हैं। इसी संदर्भ में मेलोनी सरकार स्कूलों में विदेशी छात्रों की संख्या सीमित करने की योजना पर काम कर रही है। प्रस्तावित नियमों के तहत विदेशी छात्रों के माता-पिता को भी इतालवी भाषा सीखने की शर्त से जोड़ा जा रहा है, खासकर उन मामलों में जहां बच्चों को स्कूल में घुलने-मिलने और शिक्षा व्यवस्था में शामिल होने में गंभीर दिक्कत हो रही है।
स्कूलों में एक साथ दो प्रस्तावित बदलाव
इस प्रस्ताव के दो प्रमुख हिस्से हैं। पहला, स्कूलों में बुर्का नकाब पर रोक लगाना और दूसरा, विदेशी छात्रों की संख्या सीमित रखना। इसके साथ ही उन विदेशी छात्रों के माता-पिता के लिए इतालवी भाषा सीखने की शर्त प्रस्तावित है, जिनके बच्चों को इटली की स्कूल व्यवस्था में शामिल होने में गंभीर कठिनाई हो रही है। सरकार की ओर से इन बदलावों को स्कूलों में चेहरा ढकने और छात्रों के एकीकरण से जुड़े नियमों के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है।
मेलोनी सरकार की मंजूरी के बाद प्रस्ताव संसद में भेजा जाएगा और उसे कानून का रूप देने के लिए संसद की मंजूरी आवश्यक होगी। रिपोर्ट के अनुसार, यह मंजूरी 60 दिनों के भीतर मिलनी जरूरी होगी। इसके अलावा, अगले साल होने वाले आम चुनाव और इमिग्रेशन से जुड़े राजनीतिक मुद्दे भी इस पूरे विषय को महत्वपूर्ण बनाते हैं। वहीं, यूरोप में सार्वजनिक जगहों पर चेहरे को ढकने से संबंधित पहले से मौजूद नियमों और अदालतों के फैसलों का संदर्भ भी इस बहस में शामिल है।
