गांधी भोपाल यात्रा: नवाब हमीदुल्लाह ने करा दिया था पूरा शहर खादीमय, 18 साल बाद नेहरू ने भेजी सीक्रेट चिट्ठी
भोपाल यात्रा से जुड़ा ऐतिहासिक सिलसिला
महात्मा गांधी की गांधी यात्रा से जुड़ा भोपाल का इतिहास एक दिलचस्प सिलसिला सामने लाता है। सितंबर 1929 में गांधी नवाब हमीदुल्लाह खान के निमंत्रण पर भोपाल आए थे। करीब 18 साल बाद 8 जनवरी 1947 को जवाहरलाल नेहरू ने नई दिल्ली से उसी नवाब को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में नेहरू ने बताया कि नवाब की ओर से गांधी के लिए भेजा गया पत्र उन्होंने गांधी तक पहुंचा दिया है। 1929 की यह यात्रा गांधी की भोपाल की पहली यात्रा थी। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के मुताबिक, गांधी सितंबर में तीन दिन भोपाल में रहे और राहत मंजिल में ठहरे। उनके स्वागत के लिए नवाब की ओर से वहां खादी का खास इंतजाम कराया गया था।
उस दौर में गांधी स्वतंत्रता आंदोलन के बीच देशभर में सक्रिय थे और भोपाल की यात्रा भी राजनीतिक मुलाकातों और कार्यक्रमों से जुड़ी थी। गांधी जब भोपाल आए तो शहर में खादी का रंग दिखाई दिया। उस समय उनके स्वागत से जुड़ी तैयारियों में खादी को खास महत्व दिया गया था। गांधी के आसपास के माहौल में भी हाथ से बुने कपड़ों का इस्तेमाल दिखाई देता था। यह यात्रा सिर्फ एक औपचारिक दौरा नहीं थी, बल्कि उस दौर के राजनीतिक और सामाजिक माहौल से भी जुड़ी हुई थी।
बेनजीर पैलेस के मैदान में हुई बड़ी सभा
गांधी ने भोपाल में बेनजीर पैलेस के मैदान में एक बड़ी सभा को भी संबोधित किया था। भारतीय संस्कृति पोर्टल के अनुसार, 1929 में बेनजीर पैलेस के मैदान में गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया था। भोपाल का यह ऐतिहासिक स्थान आज भी उस दौरे की याद से जुड़ा हुआ है। इतिहासकार सिकंदर मलिक के मुताबिक, गांधी को भोपाल बुलाने के पीछे नवाब हमीदुल्लाह खान की राजनीतिक भूमिका भी महत्वपूर्ण थी। वह चैंबर ऑफ प्रिंसेज के चांसलर थे और उस दौर में कांग्रेस तथा मुस्लिम लीग के बीच एक पुल की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहे थे।
इसी वजह से गांधी यात्रा स्वतंत्रता संघर्ष और भारतीय रियासतों की भूमिका जैसे मुद्दों से जुड़ी हुई थी। बेनजीर पैलेस का मैदान गांधी के भोपाल प्रवास का एक उल्लेखनीय पड़ाव था। यहां उन्होंने सार्वजनिक सभा को संबोधित किया और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े विचार सामने रखे। इस यात्रा के दौरान राजनीतिक बातचीत और सार्वजनिक कार्यक्रम दोनों हुए थे। इस तरह गांधी का भोपाल प्रवास उस समय के बड़े राजनीतिक संदर्भ से जुड़ा हुआ था।
1933 में गांधी फिर भोपाल पहुंचे
भोपाल से गांधी का रिश्ता 1929 के बाद भी बना रहा। उनकी दूसरी भोपाल यात्रा दिसंबर 1933 में हुई। गांधी की यात्राओं की विस्तृत कालक्रम सूची के अनुसार, 9 दिसंबर 1933 को वह भोपाल पहुंचे और यहां सार्वजनिक सभा को संबोधित किया। इससे यह भी सामने आता है कि 1929 का दौरा गांधी का भोपाल से पहला संपर्क था, लेकिन इसके बाद भी शहर से उनका जुड़ाव बना रहा। 1933 की दूसरी यात्रा ने इस संबंध को आगे बढ़ाया। दोनों दौर की यात्राएं स्वतंत्रता आंदोलन के समय के राजनीतिक और सामाजिक माहौल से जुड़ी थीं। 1929 में गांधी की यात्रा के समय भोपाल में उनके स्वागत और खादी से जुड़ी तैयारियां की गई थीं। नवाब हमीदुल्लाह खान की भूमिका भी इसी संदर्भ में सामने आती है। उस दौर में रियासतों, कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच राजनीतिक संवाद का भी अपना महत्व था।
18 साल बाद नेहरू की चिट्ठी
8 जनवरी 1947 को जवाहरलाल नेहरू ने नई दिल्ली से नवाब हमीदुल्लाह खान को पत्र लिखा। पत्र में नेहरू ने बताया कि नवाब की ओर से गांधी के लिए भेजा गया पत्र उन्होंने गांधी तक पहुंचा दिया है। यानी 1929 की यात्रा के लगभग 18 साल बाद भी उस पुराने राजनीतिक संपर्क का सिलसिला एक पत्र के जरिए सामने आया।
इस घटना से भोपाल, गांधी और नवाब हमीदुल्लाह के बीच बने उस पुराने संबंध की एक और कड़ी सामने आती है। एक तरफ 1929 की यात्रा थी, जिसमें गांधी तीन दिन भोपाल में रहे, राहत मंजिल में ठहरे और बेनजीर पैलेस के मैदान में सभा की। दूसरी तरफ 1933 की दूसरी यात्रा और फिर 1947 में नेहरू द्वारा लिखा गया पत्र था। इस तरह गांधी यात्रा से जुड़ी भोपाल की कहानी केवल एक ऐतिहासिक दौरे तक सीमित नहीं रहती, बल्कि कई वर्षों तक चलने वाले राजनीतिक और सामाजिक संपर्क की तस्वीर पेश करती है।
