बड़े तालाब में 8 हजार लीटर सोयाबीन तेल फैला, गाढ़ी परत से जलीय जीवन पर संकट
टैंकर पलटने के बाद बड़े तालाब तक पहुंचा तेल
भोपाल की वीआईपी रोड पर कोहेफिजा चौराहे के पास मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात एक अनियंत्रित टैंकर पलटने से हजारों लीटर सोयाबीन तेल सड़क पर बह गया था। हादसे के बाद यह तेल बहते हुए नाले के रास्ते शहर की जीवनरेखा कहे जाने वाले बड़े तालाब यानी अपर लेक तक पहुंच गया। इस घटना से संबंधित पहले सामने आए विवरण में करीब 8 हजार लीटर तेल बहने और नाले के जरिए तालाब तक पहुंचने का खुलासा हुआ था। अब बड़े तालाब के हिस्से में इस खाद्य तेल का प्रसार डेढ़ एकड़ से अधिक क्षेत्र में हो चुका है। किनारे के जलक्षेत्र और वहां उगी जलकुंभी पर तेल की एक मोटी और चिपचिपी परत जम गई है। इससे जलक्षेत्र में तेल के फैलाव को लेकर पर्यावरणीय चिंता बढ़ गई है।
हवा और सूर्य की किरणों का पानी तक पहुंचना प्रभावित
जिस जगह तेल फैला है, वहां नाले का सीवेज और दूसरे दूषित तत्व भी मिलते हैं। पानी की ऊपरी सतह पर तेल जमा हो जाने के कारण हवा और सूर्य की किरणें सीधे पानी के भीतर प्रवेश नहीं कर पा रही हैं। इसके चलते जलीय वनस्पतियों में प्रकाश संश्लेषण यानी फोटोसिंथेसिस बाधित हो रही है। प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया प्रभावित होने से पानी में घुले प्राकृतिक ऑक्सीजन के संतुलन के बिगड़ने का गंभीर खतरा है। इसके अलावा तालाब के प्राकृतिक तंत्र में तेल के मिलने से क्षेत्र में पानी की शुद्धता खराब होने और तेज दुर्गंध फैलने का जोखिम भी बढ़ गया है। जिस जगह तेल का फैलाव हुआ है, वहां सीवेज और अन्य दूषित तत्व मौजूद होने की बात भी सामने आई है। हालांकि, जलीय जीवों पर तेल के सटीक प्रभाव का पता पानी के वैज्ञानिक नमूनों की जांच के बाद ही चलेगा।
विशेषज्ञ ने बताया चिंताजनक प्रभाव
टाउन प्लानर और बड़े तालाब विशेषज्ञ डॉ. शीतल शर्मा के अनुसार तालाब के प्राकृतिक तंत्र में तेल का मिलना वहां के जलीय जीवन के लिए चिंताजनक स्थिति है। सतह पर जमा तेल की परत पौधों की प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया को रोक सकती है। इससे पानी में ऑक्सीजन का स्तर गिर सकता है और तालाब के जलीय पर्यावरण पर असर पड़ने की आशंका है। फिलहाल इस स्थिति का सटीक असर वैज्ञानिक नमूनों की जांच के बाद सामने आएगा। इसलिए तेल की मोटी परत, जलकुंभी पर जमा खाद्य तेल और नाले के दूषित तत्वों के तालाब तक पहुंचने का मामला पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बड़े तालाब के प्राकृतिक जल तंत्र में इस तरह के प्रदूषण को लेकर विशेषज्ञों की चिंता भी सामने आई है।
