नई दिल्ली: नोटबंदी में बैंक में कैश जमा करना पड़ा भारी? इनकम टैक्स केस में मिली बड़ी राहत

नोटबंदी के दौरान बैंक में कैश जमा करने और इनकम टैक्स नोटिस का मामला

नोटबंदी के दौरान बैंक में कैश जमा करने का मामला

अगर किसी व्यक्ति के पास कैश में हुई आय का पूरा रिकॉर्ड और पैसों का ट्रेल मौजूद है, तो केवल बड़ी मात्रा में नकद जमा करने के आधार पर उसे अघोषित आय नहीं माना जा सकता। बेंगलुरु स्थित आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण ने ऐसे ही एक मामले में मकान मालिक को बड़ी राहत दी है। मामला नोटबंदी के दौरान बैंक में जमा किए गए कैश से जुड़ा था।

बेंगलुरु के इस व्यक्ति के पास कुछ प्रॉपर्टी थीं, जिन्हें उसने किराये पर दे रखा था। वह किराये की रकम के साथ-साथ किरायेदारों से मिलने वाला एडवांस भी कई बार कैश में लेता था। उसके पास सैलरी, हाउस प्रॉपर्टी और अन्य स्रोतों से भी आय थी। नोटबंदी के दौरान यानी नवंबर से 30 दिसंबर 2016 के बीच उसने अपने बैंक खाते में कुल 4,96,500 रुपये कैश जमा किए। आयकर विभाग ने इसके बाद उसके रिटर्न को जांच के लिए चुना और बैंक में जमा की गई इस रकम के स्रोत को लेकर सवाल उठाए।

आयकर विभाग ने रकम को अघोषित आय माना

आयकर अधिकारी ने जमा की गई रकम को लेकर मकान मालिक से स्रोत बताने को कहा। विभाग ने नोटबंदी के दौरान बैंक में जमा रकम को लेकर जांच की। मामले में जमा किए गए 4.96 लाख रुपये को अनएक्सप्लेंड मनी यानी अघोषित आय मानते हुए टैक्स एडिशन किया गया। इसके बाद मामला आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण तक पहुंचा। मकान मालिक ने अपने पक्ष में बैंक और कैश से जुड़े रिकॉर्ड पेश किए और बताया कि जमा की गई रकम किसी नई या अचानक हुई आय से संबंधित नहीं थी।

मकान मालिक ने पेश किए कई वित्तीय रिकॉर्ड

मकान मालिक ने अपने दावे के समर्थन में कैश बुक, बैंक स्टेटमेंट, कैश-फ्लो स्टेटमेंट, वित्तीय विवरण और अन्य रिकॉर्ड पेश किए। उसका कहना था कि बैंक में जमा रकम के पीछे पहले से मौजूद कैश और किराये से जुड़ी प्राप्तियां थीं। उसने यह भी बताया कि उसके पास किराये की रकम के साथ-साथ किरायेदारों से मिलने वाला एडवांस भी कैश में आता था। इसलिए बैंक में जमा रकम को केवल नोटबंदी के दौरान हुई नकद जमा के आधार पर नई आय नहीं माना जाना चाहिए।

मामले में मकान मालिक ने यह भी बताया कि 1 अप्रैल 2016 को उसके पास करीब 10.05 लाख रुपये का कैश बैलेंस था। उसके मुताबिक इसमें पिछले साल की बची रकम भी शामिल थी। इसके अलावा किराये और अन्य घोषित स्रोतों से धीरे-धीरे कैश जमा हुआ था। अपने दावे को मजबूत करने के लिए उसने कैश बुक, बैंक स्टेटमेंट, कैश-फ्लो स्टेटमेंट, वित्तीय विवरण और अन्य रिकॉर्ड न्यायाधिकरण के सामने पेश किए।

ट्रिब्यूनल ने हटाया पूरा टैक्स एडिशन

मामले में आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण ने मकान मालिक के पक्ष को स्वीकार किया। ट्रिब्यूनल ने नोटबंदी के दौरान बैंक में जमा किए गए 4.96 लाख रुपये को अनएक्सप्लेंड मनी यानी अघोषित आय मानकर की गई पूरी टैक्स एडिशन को हटा दिया। मामले में यह महत्वपूर्ण रहा कि करदाता ने नकद रकम के स्रोत और उसके पहले से मौजूद होने को लेकर रिकॉर्ड पेश किए थे। इस फैसले से ऐसे मामलों में यह बात सामने आती है कि केवल बैंक खाते में बड़ी मात्रा में कैश जमा होना ही उसे अघोषित आय साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं माना जा सकता, यदि रकम के स्रोत और पैसों का ट्रेल रिकॉर्ड से समझाया जा सके।

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