पॉलिसी बाजार का शेयर दो दिन में 40% से ज्यादा गिरा, अब कहां तक जाएगी कीमत?

पॉलिसी बाजार और PB Fintech शेयर में गिरावट

दो दिनों में शेयर 40 फीसदी से ज्यादा नीचे

पॉलिसी बाजार की पैरेंट कंपनी PB Fintech के शेयर में लगातार दूसरे दिन भी गिरावट देखने को मिली। गुरुवार को यह शेयर 36 फीसदी तक गिर गया था और शुक्रवार को भी इसमें गिरावट आई। कंपनी के शेयरों में शुक्रवार को दिन के उच्चतम स्तर से 12 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई। शुक्रवार को पॉलिसी बाजार का शेयर करीब 1,115 रुपए तक गिरा।

दो दिनों में शेयर 40 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है। इससे निवेशकों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि कंपनी के शेयर की कीमत आगे कहां तक जा सकती है। शुक्रवार के शुरुआती कारोबार में शेयर 1,262 रुपए तक उछला था, लेकिन दिन बढ़ने के साथ इसमें फिर गिरावट आई। दोपहर 12:40 बजे बीएसई पर यह 4.76 फीसदी की गिरावट के साथ 1,135.30 रुपए पर कारोबार कर रहा था।

IRDAI के प्रस्ताव से बढ़ा दबाव

शेयर में गिरावट के बीच भारतीय बीमा नियामक IRDAI के प्रस्तावित बदलावों को एक प्रमुख वजह माना जा रहा है। IRDAI ने इंश्योरेंस वेबसाइटों पर डार्क पैटर्न पर रोक लगाने का प्रस्ताव दिया है। इसके अलावा एजेंटों, ब्रोकर्स और बैंकों के कमीशन पर लगाम लगाने के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए मिससेलिंग पर सख्ती का सुझाव दिया गया है। प्रस्तावित बदलावों का असर इंश्योरेंस कंपनियों और पॉलिसीबाजार जैसे डिस्ट्रीब्यूटर्स के कारोबार पर पड़ने की आशंका जताई गई है। ब्रोकरेज के अनुमानों के अनुसार प्रस्तावित बदलावों से इंश्योरेंस कंपनियों के लिए नए ग्राहक बनाना महंगा हो सकता है। इससे डिस्ट्रीब्यूशन के इकोनॉमिक्स पर असर पड़ने की बात कही गई है।

ब्रोकरेज ने घटाया टारगेट प्राइस

जेफरीज ने PB Fintech के लिए अपना टारगेट प्राइस 2,050 रुपए से घटाकर 1,340 रुपए कर दिया है। मौजूदा स्तर से इसमें 20 फीसदी की बढ़त की संभावना बताई गई है। साथ ही ब्रोकरेज ने अपनी बाय रेटिंग बरकरार रखी है। जेफरीज का अनुमान है कि नए बिजनेस कमीशन दरों में 10 फीसदी की कटौती से कमाई में 10 से 12 फीसदी की गिरावट आ सकती है। मोतीलाल ओसवाल ने भी फिनटेक कंपनी पर न्यूट्रल रेटिंग बरकरार रखी है और इसका टारगेट प्राइस 1,150 रुपए तय किया है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि प्रस्तावित बदलावों से कोर ऑनलाइन इंश्योरेंस रेवेन्यू में लगभग 30 फीसदी की कमी आ सकती है।

कंपनी के कारोबार पर क्या असर पड़ेगा?

पॉलिसी बाजार के शेयर में गिरावट के बीच प्रस्तावित नियमों के असर को लेकर बाजार में चर्चा तेज हुई है। IRDAI के प्रस्तावों में कमीशन और मिससेलिंग से जुड़े नियमों को लेकर बदलाव की बात है। लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों को अपने मैनेजमेंट के खर्च को दो साल के भीतर ग्रॉस डायरेक्ट प्रीमियम इनकम के 15 फीसदी और पांच साल के भीतर 12.5 फीसदी तक कम करने का प्रस्ताव दिया गया है।

जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के लिए रेगुलेटर ने खर्च की सीमा को पांच साल में 30 फीसदी से घटाकर 20 फीसदी करने का प्रस्ताव दिया है। IRDAI ने एक नया फ्रेमवर्क भी प्रस्तावित किया है, जिसमें कमीशन की सीमाएं प्रोडक्ट सेगमेंट, बिजनेस लाइन, डिस्ट्रीब्यूशन चैनल, पॉलिसी साइज, प्रोडक्ट की जटिलता और उसे बेचने व सर्विस देने में लगने वाली मेहनत पर निर्भर करेंगी।

नितिन कामत ने भी जताई चिंता

जीरोधा के को-फाउंडर नितिन कामत ने चेतावनी दी कि किसी भी रेगुलेटेड फाइनेंशियल बिजनेस के लिए रेगुलेटरी रिस्क सबसे बड़ा खतरा है। उन्होंने कहा कि बिजनेस का गणित बहुत तेजी से बदल सकता है। कामत ने IRDAI के ड्राफ्ट का हवाला देते हुए कहा कि फिनटेक और ब्रोकिंग बिजनेस पर भी इसका असर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ब्रोकिंग इससे अलग नहीं है। रेगुलेटर ने इंश्योरेंस कंपनियों और बड़े डिस्ट्रीब्यूटरों को अपनी कमीशन पॉलिसी ग्राहकों को आसान भाषा में बताने का सुझाव दिया है। प्रस्तावित बदलावों के बाद कारोबार के गणित में बदलाव की संभावना के बीच कंपनी के शेयर पर दबाव बना हुआ है।

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