शेयर बाजार क्रैश: अक्टूबर के पहले दिन 10 लाख करोड़ का झटका

शेयर बाजार में सेंसेक्स और निफ्टी की भारी गिरावट

अक्टूबर के पहले दिन बाजार में भारी गिरावट

सितंबर में शेयर बाजार में भारी बिकवाली रही और निवेशकों को लाखों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। माना जा रहा था कि अक्टूबर का महीना निवेशकों के लिए खुशियां लेकर आएगा क्योंकि ऐतिहासिक रूप से यह महीना शेयर बाजार के लिए अच्छा रहा है। लेकिन महीने के पहले ही दिन निवेशकों को करीब 10 लाख करोड़ रुपये का झटका लगा। शेयर बाजार क्रैश के बीच सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 1.5 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई।

लगातार विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और अन्य कारणों से निवेशक डरे हुए थे। बीएसई सेंसेक्स करीब 1,000 अंक गिरकर 71,400 के नीचे आ गया, जबकि निफ्टी 50 में करीब 400 अंक की गिरावट आई और यह 22,300 के नीचे चला गया। इस भारी बिकवाली के कारण बीएसई पर सूचीबद्ध सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैप लगभग 10 लाख करोड़ रुपये कम होकर 462 लाख करोड़ रुपये से नीचे आ गया। बाजार में गिरावट का असर केवल सेंसेक्स और निफ्टी तक सीमित नहीं रहा। ब्रॉडर मार्केट में भी भारी गिरावट देखी गई और कई सेक्टरों के शेयरों में दबाव रहा।

किन शेयरों में आई सबसे ज्यादा गिरावट

बाजार की इस गिरावट में ऑटो सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित रहा। निफ्टी ऑटो में 4 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई और यह सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाला सेक्टर रहा। इसी तरह निफ्टी मेटल, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और कई अन्य सेक्टरों में 2 से 3 फीसदी की गिरावट आई।

शेयरों की बात करें तो एमएंडएम, मारुति सुजुकी, टाटा स्टील, अडानी पोर्ट्स, अल्ट्राटेक सीमेंट, आईटीसी, एचयूएल और बीईएल के शेयरों में 3 से 4 फीसदी की गिरावट आई और ये सेंसेक्स में सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयर रहे। वहीं एचडीएफसी बैंक, आईटीसी, पावर ग्रिड, बजाज फाइनेंस, एटरनल और टाइटन के शेयरों में 2 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई। इसके उलट आईसीआईसीआई बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक के शेयरों में लगभग 1 फीसदी की बढ़त देखी गई। हालांकि इन कुछ शेयरों की बढ़त व्यापक बाजार में आई गिरावट को संभाल नहीं सकी।

ब्रॉडर मार्केट में भी बिकवाली

ब्रॉडर मार्केट में भी भारी गिरावट देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में लगभग 2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। दोपहर बाद बिकवाली तेज होने के साथ ही बाजार में उतार-चढ़ाव मापने वाला इंडिया VIX 42 फीसदी से ज्यादा बढ़कर 15.75 पर पहुंच गया। सभी सेक्टरों में गिरावट देखी गई। निफ्टी ऑटो में 4 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई, जबकि निफ्टी मेटल, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और कई अन्य सेक्टरों में 2-3 फीसदी की गिरावट रही। बाजार का रुख काफी नकारात्मक रहा। बीएसई पर 594 शेयरों में बढ़त और 2,789 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। वहीं 99 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। आंकड़े बताते हैं कि बाजार में बिकवाली कितनी व्यापक थी।

FII की भारी बिकवाली बनी बड़ा कारण

एनएसई के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार विदेशी निवेशकों ने बुधवार को सिर्फ एक सेशन में 10,748 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे। इससे पहले मंगलवार को भी एफआईआई ने 10,743 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे थे। इस हफ्ते बुधवार तक एफआईआई की कुल बिकवाली 26,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। एफआईआई की इतनी भारी बिकवाली से निवेशकों का भरोसा कमजोर होता है। विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी बाजार पर दबाव बढ़ाती है और इससे शेयरों में बिकवाली का सिलसिला तेज हो सकता है। अक्टूबर की शुरुआत में भी यही दबाव बाजार में दिखाई दिया।

बॉन्ड यील्ड में तेजी

बॉन्ड यील्ड में भी तेजी जारी रही। अमेरिका में बेंचमार्क 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.374 फीसदी हो गई, जो 2007 के बाद का उच्चतम स्तर है। सितंबर तिमाही के दौरान इसमें 87 बेसिस पॉइंट से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई थी, जो 1994 के बाद से सबसे बड़ी तिमाही बढ़ोतरी थी। बॉन्ड यील्ड बढ़ने से आम तौर पर डेट मार्केट निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक हो जाते हैं। ऐसे माहौल में इक्विटी बाजार पर दबाव बढ़ सकता है और विदेशी निवेशकों के रुख पर भी इसका असर पड़ सकता है।

रुपये में गिरावट और ऑटो शेयरों का दबाव

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से डॉलर इंडेक्स तीन महीने से ज्यादा के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। इस कारण रुपये में गिरावट आई। हालांकि आरबीआई के दखल से नुकसान कुछ सीमित रहा। रॉयटर्स के मुताबिक सरकारी बैंकों द्वारा डॉलर बेचे जाने के कारण रुपया 0.76 फीसदी गिरकर 95.9850 प्रति डॉलर पर आ गया। रुपये के 95.60-96.20 की रेंज में रहने की उम्मीद थी। सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट की एक वजह ऑटो सेक्टर के बड़े शेयरों में आई कमी भी रही। ऑटो शेयरों में भारी बिकवाली ने बाजार पर अतिरिक्त दबाव बनाया। इस तरह एफआईआई की बिकवाली, बॉन्ड यील्ड में तेजी, रुपये में कमजोरी और ऑटो सेक्टर में गिरावट समेत कई कारणों ने बाजार को प्रभावित किया।

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