Aava पानी पर विवाद, चुनाव आयुक्तों की टेबल पर 500 रुपए लीटर की बोतल

चुनाव आयोग की बैठक में रखी Aava पानी की बोतल

चुनाव आयोग की बैठक में दिखी Aava की बोतल

नई दिल्ली में शनिवार को चुनाव आयोग की एक बैठक हुई थी। बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ दोनों अन्य चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी भी मौजूद थे। बैठक की तस्वीरों में चुनाव आयुक्तों की टेबल पर रखी पानी की बोतलों ने लोगों का ध्यान खींचा। ये बोतलें Aava कंपनी की बताई गईं।

इसके बाद सोशल मीडिया पर इस पानी की कीमत को लेकर चर्चा शुरू हो गई। अमेजन वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इस पानी की कीमत करीब 500 रुपए प्रति लीटर बताई गई है। महंगी पानी की बोतल को लेकर सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल उठाने शुरू कर दिए कि चुनाव आयोग की बैठक में इतनी महंगी बोतल क्यों रखी गई थी। इसी वजह से Aava पानी को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई और कंपनी के मालिक तथा उनके कारोबारी कनेक्शन की भी चर्चा शुरू हो गई।

500 रुपए प्रति लीटर कीमत को लेकर सवाल

Aava कंपनी का पानी देश के बड़े और आलीशान होटलों में भी उपलब्ध होने की बात सामने आई है। इनमें ताज, ओबेरॉय, मैरियट और हयात जैसे होटल शामिल हैं। कंपनी के पानी की कीमत आम बोतलबंद पानी की तुलना में काफी अधिक बताई जा रही है। सोशल मीडिया पर लोगों ने इसी कीमत को लेकर सवाल उठाए। कुछ लोगों ने सवाल किया कि यदि चुनाव आयोग के सामने रखी बोतल वास्तव में इतनी महंगी है, तो इसके खर्च का भुगतान किस मद से किया गया। इसी चर्चा के दौरान लोगों ने चुनाव आयोग के खर्च और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता की बात भी उठाई। यह विवाद मुख्य रूप से उस तस्वीर के सामने आने के बाद शुरू हुआ, जिसमें बैठक के दौरान Aava कंपनी की पानी की बोतल दिखाई दे रही थी। Aava पानी की कीमत को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

कंपनी मालिक का गुजरात से कनेक्शन

पानी की बोतल की कीमत चर्चा में आने के साथ ही Aava कंपनी के मालिक की जानकारी भी सोशल मीडिया पर चर्चा का हिस्सा बन गई। रिपोर्ट में कंपनी के मालिक बेहराम मेहता का जिक्र किया गया है। बताया गया है कि उनका संबंध गुजरात से है। कंपनी की बोतल चुनाव आयोग की बैठक में दिखाई देने के बाद सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने कंपनी के कारोबारी और क्षेत्रीय कनेक्शन को लेकर भी सवाल उठाए। हालांकि उपलब्ध रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि चुनाव आयोग की बैठक में इस विशेष ब्रांड की बोतल रखने के पीछे कोई विशेष कारण क्या था। इस वजह से Aava पानी से जुड़ा विवाद मुख्य रूप से बोतल की कीमत, बैठक में उसकी मौजूदगी और कंपनी के मालिक के गुजरात कनेक्शन को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चा के आसपास रहा।

सोशल मीडिया पर लोगों ने उठाए खर्च और जवाबदेही के सवाल

चुनाव आयोग की टेबल पर रखी पानी की बोतल को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कई लोगों ने सवाल उठाए। एक यूजर ने लिखा कि यदि जनता के पैसे से चुनाव आयुक्तों के लिए इतना महंगा पानी खरीदा जा रहा है तो करदाताओं को यह जानने का अधिकार है कि इस पर कितना खर्च किया जा रहा है।

एक अन्य पोस्ट में सवाल उठाया गया कि चुनाव आयोग की बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों के सामने प्रीमियम पानी की बोतल क्यों रखी गई थी। इस चर्चा में सार्वजनिक धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग भी सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया पर उठे सवालों के बाद ही पानी की बोतल, उसकी कीमत और कंपनी के मालिक के कनेक्शन को लेकर चर्चा और तेज हुई।

विवाद की वजह बनी तस्वीर

पूरे मामले की शुरुआत चुनाव आयोग की बैठक की तस्वीर से हुई। तस्वीर में तीनों चुनाव आयुक्तों के सामने Aava कंपनी की पानी की बोतल रखी दिखाई दी। इसके बाद लोगों ने बोतल के ब्रांड और कीमत पर ध्यान दिया। रिपोर्ट में बताया गया है कि Aava पानी की कीमत करीब 500 रुपए प्रति लीटर है और यह देश के बड़े होटलों में भी उपलब्ध है। इसी आधार पर सोशल मीडिया पर चुनाव आयोग के खर्च से जुड़े सवाल उठाए गए। फिलहाल उपलब्ध समाचार में चुनाव आयोग की ओर से इस बोतल के इस्तेमाल या इसके खर्च को लेकर कोई विस्तृत स्पष्टीकरण शामिल नहीं है। इसलिए इस मामले में सोशल मीडिया पर उठे सवालों और उपलब्ध जानकारी को अलग-अलग समझना जरूरी है।

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