फॉर्म-6 अटैचमेंट पर भाजपा का दावा, सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया को सही ठहराया
भाजपा ने राहुल गांधी के आरोपों का जवाब दिया
भाजपा ने मंगलवार को राहुल गांधी के फॉर्म-6 में बदलाव से जुड़े आरोपों पर जवाब दिया। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि चुनाव आयोग ने फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया है। उन्होंने कहा कि SIR के लिए इसके साथ एक अतिरिक्त घोषणापत्र जोड़ा गया था। पात्रा ने सुप्रीम कोर्ट के 27 मई के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अदालत ने बिहार में SIR को बरकरार रखा था।
उन्होंने कहा कि कोर्ट ने SIR के लिए अतिरिक्त दस्तावेजी प्रक्रिया की जरूरत को स्वीकार किया था। 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसने फॉर्म-6 के किसी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी है। इसके साथ ही सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर पूछा कि यदि फॉर्म में बदलाव हुआ है तो किसने और किस अधिकार के तहत किया। इसी मुद्दे को लेकर अब राहुल गांधी और भाजपा के बीच विवाद का केंद्र फॉर्म-6 बना हुआ है।
चुनाव आयोग ने राहुल के पोस्ट को बताया भ्रामक
चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के पोस्ट को भ्रामक बताते हुए कहा कि बिहार में SIR का आदेश 24 जून 2025 को आयोग की सहमति से जारी हुआ था। आयोग ने कहा कि यह आदेश सभी चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने भी 27 मई 2026 के अपने फैसले में इस आदेश को बरकरार रखा था। आयोग के अनुसार 26 सितंबर की प्रेस रिलीज में भी बताया गया था कि SIR से जुड़े मई 2026 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म-6 की घोषणा को सही माना था।
आयोग ने यह भी बताया कि मतदाता सूची में पहली बार नाम जोड़ने के लिए फॉर्म-6 भरा जाता है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जनहित याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि आयोग ने दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बिना कई फैसले लिए। इसी मामले में इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में भी दावा किया गया था कि ज्ञानेश कुमार ने दोनों अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना फॉर्म-6 से जुड़े कई फैसले लिए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने आयोग और केंद्र से जवाब मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को चुनाव आयोग और केंद्र को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। अदालत ने कहा कि यदि आयोग का फैसला कानून के खिलाफ या बिना सहमति के लिया गया पाया जाता है तो उसे रद्द किया जा सकता है। चुनाव आयोग का कहना है कि बिहार में SIR का आदेश आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी हुआ था और सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के फैसले में इस आदेश को बरकरार रखा था। अदालत ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग के फैसले सर्वसम्मति या बहुमत से लिए जाने चाहिए। इसका मतलब है कि तीन सदस्यीय आयोग में किसी एक सदस्य का अकेला फैसला पूरे आयोग का फैसला नहीं माना जा सकता। फिलहाल फॉर्म 6 अटैचमेंट को लेकर राजनीतिक आरोपों के साथ-साथ कानूनी प्रक्रिया भी जारी है।
