कैप्टन स्मित ने बचाई सैकड़ों जानें, मोदी से बोले- हनुमान चालीसा पढ़ते हुए खोला कॉकपिट
विमान में मुश्किल हालात
कैप्टन स्मित से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को करीब 9 मिनट वीडियो कॉल पर बात की। स्मित ने दो दिन पहले दुबई से तेल अवीव जा रहे विमान की हाईजैकिंग नाकाम की थी। लेख के अनुसार ओमानी को-पायलट ने उन्हें चाकू मारा, लेकिन घायल होने के बाद भी स्मित ने विमान को क्रैश नहीं होने दिया। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि वह विमान उड़ा रहे थे और अचानक नीचे गिर गए, जिससे उन्हें काफी चोटें आईं। इसके बावजूद उन्हें महसूस हो रहा था कि विमान नीचे जा रहा है। ऐसी स्थिति में भी उन्होंने हालात को संभालने की कोशिश जारी रखी और विमान को नीचे जाने से रोकने की दिशा में काम किया।
आखिरी मौके पर खोला कॉकपिट
कैप्टन स्मित ने PM मोदी से कहा कि उन्हें पता था कि यह आखिरी मौका है। उन्होंने बताया कि दरवाजा वहीं था और उन्होंने उसे खोल दिया। उनके अनुसार मुश्किल समय में वह हनुमान चालीसा पढ़ते हैं और उस समय भी वह उसे पढ़ रहे थे। उन्होंने कहा कि उन्हें पता है कि भगवान ने ही उन्हें बचाया। बात करते हुए वे भावुक भी हो गए। उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा कि उनका फोन आना उनके लिए गर्व की बात है और उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनकी मोदी से बात होगी। PM मोदी ने कहा कि उन्होंने इतना बड़ा काम किया है कि देश का हर नागरिक और दुनिया के लोग उन्हें देखना और उनसे बात करना चाहते हैं।
मोदी ने साहस और सूझबूझ की तारीफ की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बातचीत में कहा कि पूरा देश उनके लिए प्रार्थना कर रहा था और उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना की जा रही थी। उन्होंने कहा कि उनकी हिम्मत और सूझबूझ से कई लोगों की जान बची। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने उनके परिवार का भी उल्लेख किया और उनकी मां गीताबेन तथा पिता भूपेंद्रभाई को प्रणाम किया। कैप्टन स्मित की बातचीत में विमान के भीतर बने हालात और उसके नीचे जाने का अहसास होने की बात सामने आई। घायल होने के बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश की और विमान को क्रैश होने से बचाने की दिशा में काम किया।
संकट के समय निर्णय का अहम पल
पूरे घटनाक्रम में कैप्टन स्मित की भूमिका उस समय सामने आती है जब विमान में गंभीर स्थिति बन चुकी थी। उनके अनुसार उन्हें पता था कि समय बहुत कम था और दरवाजा खोलना जरूरी था। उन्होंने मुश्किल समय में हनुमान चालीसा पढ़ने की अपनी आदत का भी जिक्र किया। प्रधानमंत्री के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने अपनी भावनाएं भी व्यक्त कीं। PM मोदी ने उनकी सूझबूझ और साहस से लोगों की जान बचने की बात कही। इस पूरी बातचीत में विमान के आपात हालात, घायल होने के बावजूद काम जारी रखने और कॉकपिट के दरवाजे तक पहुंचने की कोशिश मुख्य बिंदु रहे।
