DU Election में Victory Procession पर रोक, 140 उम्मीदवारों को नोटिस; वोटिंग जारी

DU चुनाव में विजय जुलूस पर रोक और 140 उम्मीदवारों को कारण बताओ सूचना

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा निर्देश दिया। DU चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद किसी भी तरह का विजय जुलूस निकालने पर रोक लगा दी गई है। अदालत ने साफ किया कि यह रोक केवल दिल्ली की सड़कों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि दिल्ली विश्वविद्यालय के परिसर और छात्रावासों में भी लागू होगी। अदालत का यह निर्देश चुनाव के दौरान नियमों के उल्लंघन और हिंसा से जुड़ी शिकायतों पर सुनवाई के दौरान आया।

मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने चुनाव लड़ रहे सभी छात्र संगठनों और 140 उम्मीदवारों को कारण बताओ सूचना जारी की है। अदालत ने पूछा कि चुनाव नियमों के उल्लंघन के आरोपों को देखते हुए उन पर सामूहिक हर्जाना क्यों नहीं लगाया जाना चाहिए। अदालत ने चुनाव प्रक्रिया के दौरान लागू नियमों और लिंगदोह समिति की सिफारिशों के पालन को लेकर भी गंभीरता दिखाई।

अदालत ने विजय जुलूस को लेकर जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस को दी है। निर्देश के उल्लंघन पर आपराधिक और प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है। अदालत की अवमानना की कार्रवाई भी हो सकती है। अदालत ने दिल्ली पुलिस और दूसरे संबंधित अधिकारियों को पुराने अदालती आदेशों तथा लिंगदोह समिति की सिफारिशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाने को कहा है। सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाने के लिए भी अधिकारियों को कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।

मतदान के बीच आया अदालत का आदेश

DU चुनाव के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय में शुक्रवार को मतदान हो रहा था। महाविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए सुबह की पाली का मतदान सुबह 8:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक हुआ, जबकि शाम की पाली के विद्यार्थियों के लिए मतदान दोपहर 3 बजे से शाम 7:30 बजे तक निर्धारित था। चुनाव के परिणाम 19 सितंबर को आने थे। इस चुनाव में करीब 2.75 लाख विद्यार्थी मतदान के लिए पात्र बताए गए थे।

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ का चुनाव देश के सबसे बड़े छात्र चुनावों में शामिल है। इस चुनाव में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष सहित प्रमुख पदों के लिए उम्मीदवार मैदान में हैं। समाचार पत्र में अध्यक्ष पद के लिए यश डबास और उपाध्यक्ष पद के लिए ईशू मौर्या को प्रत्याशी बताया गया है। वहीं एक अन्य प्रमुख प्रत्याशी के रूप में वीर चतरथ का भी उल्लेख किया गया है।

पिछले चुनाव में चार में से तीन पद जीते थे

समाचार पत्र के अनुसार, वर्ष 2025 के चुनाव में एक संगठन ने चार प्रमुख पदों में से तीन पदों पर जीत दर्ज की थी। इस बार भी छात्र संगठनों के बीच चुनाव को लेकर मुकाबला जारी है। अदालत ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े नियमों के उल्लंघन पर सुनवाई करते हुए सभी उम्मीदवारों और छात्र संगठनों से जवाब मांगा है।

अदालत ने कहा कि विजय जुलूस निकालने की अनुमति नहीं होगी। इसकी जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस की होगी कि परिणाम आने के बाद कोई उम्मीदवार, छात्र या अन्य व्यक्ति इस तरह का जुलूस न निकाले। आदेश का पालन नहीं करने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक तथा प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है और इसे अदालत की अवमानना भी माना जा सकता है।

हिंसा को लेकर अदालत ने मांगी रिपोर्ट

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव के दौरान हिंसा और कथित गुंडागर्दी से जुड़े मामलों पर भी अदालत ने नाराजगी जताई। अदालत ने दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन, दिल्ली पुलिस और सरकार से अगले दिन तक कार्रवाई रिपोर्ट मांगी थी। अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि यदि उठाए गए कदम संतोषजनक नहीं पाए गए, तो मतों की गिनती और परिणाम घोषित करने पर रोक लगाने का फैसला भी लिया जा सकता है।

समाचार पत्र के अनुसार, चुनाव से पहले बुधवार रात उत्तर परिसर में विद्यार्थियों के दो गुटों के बीच झड़प हुई थी। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर अलग-अलग स्थानों पर हमला करने के आरोप लगाए थे। इसी तरह की घटनाओं और चुनाव नियमों के उल्लंघन से जुड़ी शिकायतों पर सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को अपराध और हिंसा का माध्यम नहीं बनने दिया जा सकता।

सभी महाविद्यालय सीधे मतदान में शामिल नहीं

दिल्ली विश्वविद्यालय में दो प्रमुख परिसर हैं। दक्षिण और उत्तर परिसर लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। दोनों परिसरों को मिलाकर दिल्ली विश्वविद्यालय में 91 महाविद्यालय आते हैं, लेकिन छात्रसंघ चुनाव में सभी महाविद्यालय सीधे मतदान नहीं करते। समाचार पत्र के अनुसार, वर्ष 2025 में केवल 32 महाविद्यालय और संकाय सीधे मतदान में शामिल थे। सेंट स्टीफंस, लेडी श्रीराम और जीसस एंड मैरी जैसे कुछ बड़े महाविद्यालय भी दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ के मतदान में शामिल नहीं हैं।

अदालत ने चुनाव के दौरान हुई हिंसा पर सुनवाई करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन, दिल्ली पुलिस और सरकार से रिपोर्ट मांगी। अदालत ने पुराने आदेशों और लिंगदोह समिति की सिफारिशों को लागू कराने के लिए भी आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया। इसके साथ ही सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाने और चुनाव प्रक्रिया में नियमों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों को दी गई।

इस तरह DU चुनाव में मतदान प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही अब परिणाम और उसके बाद की गतिविधियों पर अदालत के निर्देश लागू रहेंगे। परिणाम आने के बाद विजय जुलूस नहीं निकाला जा सकेगा। 140 उम्मीदवारों और छात्र संगठनों से चुनाव नियमों के उल्लंघन से जुड़े आरोपों पर जवाब मांगा गया है। अदालत ने साफ किया है कि उसके निर्देशों का पालन करना संबंधित उम्मीदवारों, विद्यार्थियों और संगठनों की जिम्मेदारी होगी।

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