महिला नौकरी मामले में इंडियन ऑयल देगा ₹12 लाख मुआवजा, 38 साल बाद सुप्रीम कोर्ट का आदेश
हरियाणा की महिला सुमित्रा को नौकरी नहीं देने का करीब 38 साल पुराना मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन को सुमित्रा को ₹12 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ महिला होने के आधार पर नौकरी से इनकार करना नारीत्व और गरिमा का अपमान है। सुमित्रा अब सेवानिवृत्ति की उम्र तक पहुंच चुकी हैं, इसलिए कोर्ट ने नौकरी देने के बजाय मुआवजा देने का आदेश दिया।
1978 में 49 लोगों की सूची में था सुमित्रा का नाम
यह महिला नौकरी मामला वर्ष 1978 का है। उस समय सुमित्रा का नाम उन 49 लोगों की सूची में शामिल था, जिनकी सिफारिश डिप्टी कमिश्नर की अध्यक्षता वाली समिति ने इंडियन ऑयल के एलपीजी बॉटलिंग प्लांट के लिए की थी। सुमित्रा ने खलासी, चपरासी या रिफिलिंग हेल्पर के पद के लिए इंटरव्यू दिया था। हालांकि उन्हें नौकरी नहीं मिली, जबकि सूची में शामिल दूसरे लोगों को नियुक्ति पत्र दे दिए गए थे।
नौकरी नहीं मिलने के बाद सुमित्रा ने इस फैसले के खिलाफ कानूनी रास्ता अपनाया। ट्रायल कोर्ट ने माना था कि वह नौकरी के लिए तय योग्यता पूरी करती थीं। कोर्ट ने एक गवाह के बयान का भी हवाला दिया था, जिससे यह बात सामने आई कि उन्हें महिला होने के कारण नौकरी नहीं दी गई थी। ट्रायल कोर्ट ने इंडियन ऑयल को उन्हें मजदूर के अलावा किसी अन्य उपयुक्त पद पर नियुक्त करने का निर्देश दिया था।
मामला कई अदालतों से होता हुआ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
ट्रायल कोर्ट के फैसले के बाद इंडियन ऑयल ने अपील की। पहली अपीलीय अदालत ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलट दिया। उसका कहना था कि समिति की सूची में नाम होने का मतलब यह नहीं था कि नियुक्ति का कानूनी अधिकार मिल गया था। इसके अलावा ट्रायल कोर्ट ने ऐसे पद पर नियुक्ति का निर्देश दिया था, जिसके लिए सुमित्रा का इंटरव्यू नहीं हुआ था। इसके बाद मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचा।
14 अक्टूबर 2025 को हाईकोर्ट ने पहली अपीलीय अदालत के फैसले को बरकरार रखा था। हाईकोर्ट ने कहा था कि सुमित्रा के पास नौकरी पाने का कानूनी अधिकार नहीं था। हालांकि अदालत ने यह भी माना कि अगर उन्हें लिंग के आधार पर नौकरी से वंचित किया गया हो, तब भी सीधे नियुक्ति का आदेश नहीं दिया जा सकता। इसके बाद सुमित्रा ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
सुप्रीम कोर्ट ने नौकरी की जगह मुआवजे का आदेश दिया
अब सुप्रीम कोर्ट ने इस पुराने मामले में सुमित्रा को ₹12 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत के सामने यह तथ्य था कि सुमित्रा अब सेवानिवृत्ति की उम्र पार कर चुकी हैं। इसलिए उन्हें अब नौकरी देने के बजाय आर्थिक मुआवजा देने का आदेश दिया गया। कोर्ट ने नौकरी से सिर्फ इसलिए इनकार किए जाने को गंभीर माना क्योंकि वह महिला थीं।
इस महिला नौकरी मामला में सुमित्रा ने करीब चार दशक तक कानूनी लड़ाई लड़ी। वर्ष 1978 में जिस समिति ने 49 लोगों के नाम की सिफारिश की थी, उसमें उनका नाम भी था। उन्होंने संबंधित पदों के लिए इंटरव्यू दिया था, लेकिन उन्हें नियुक्ति नहीं मिली। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इंडियन ऑयल को उन्हें ₹12 लाख मुआवजा देना होगा।
इस महिला नौकरी मामला का केंद्र यही है कि महिला होने के आधार पर नौकरी से इनकार किए जाने के आरोप पर करीब 38 साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने आर्थिक मुआवजे का रास्ता तय किया है।

