सुप्रीम कोर्ट बोला- पटाखों पर पूरी तरह बैन नहीं
पूरे देश में पूर्ण प्रतिबंध के पक्ष में नहीं कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों को लेकर सुनवाई के दौरान कहा कि पूरे देश में पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना संभव नहीं है। कोर्ट ने कहा कि पूर्ण पाबंदी से लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि लोग 24 घंटे तक लगातार आतिशबाजी कर सकेंगे। पटाखों पर बैन को लेकर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ऐसा रास्ता तलाशने की बात कही, जिसमें त्योहार मनाने की अनुमति के साथ लोगों को होने वाली परेशानी को भी ध्यान में रखा जाए।
जस्टिस एमएम सुंदरैश और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने कहा कि धार्मिक भावनाओं, स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ी चिंताओं के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। अदालत के मुताबिक पूरी तरह रोक लगाने से एक तरह की समस्या पैदा हो सकती है, जबकि बिना किसी समय सीमा के आतिशबाजी से बीमार लोगों, बुजुर्गों और बच्चों को परेशानी हो सकती है।
24 घंटे आतिशबाजी की अनुमति नहीं
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ किया कि 24 घंटे आतिशबाजी की अनुमति नहीं दी जा सकती। पटाखे चलाने के लिए समय तय करना होगा। इसका उद्देश्य यह है कि त्योहार मनाने की लोगों की भावना बनी रहे और साथ ही लंबे समय तक होने वाली आतिशबाजी से लोगों को परेशानी न हो। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में संतुलित समाधान की जरूरत है। इसके लिए यह भी तय करना होगा कि किन पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति दी जा सकती है और उनके लिए कौन से मानक लागू होंगे। इस तरह पटाखों पर बैन का सवाल केवल पूर्ण प्रतिबंध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पटाखों के प्रकार, समय और प्रदूषण से जुड़े मानकों पर भी विचार किया जा रहा है।
केंद्र और सीपीसीबी को जांच के लिए समय
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पटाखों से जुड़े परीक्षणों के लिए समय दिया है। कोर्ट ने पटाखों में बेरियम की मौजूदगी की जांच, डेसिबल स्तर तय करने और फायर टेस्ट करने के लिए समय दिया है। इन परीक्षणों के आधार पर पटाखों के इस्तेमाल और मानकों को लेकर आगे निर्णय लिया जा सकता है। सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने एक नोट भी पेश किया। इसमें कुछ खास पटाखों को सीमित और शर्तों के साथ छूट देने पर विचार की बात कही गई। इन पटाखों को नेक्स्ट-जेनरेशन जॉइंट ग्रीन क्रैकर्स के रूप में विकसित किया गया है। इन पटाखों को काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च-नेशनल एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट के सहयोग से विकसित किया गया है। नए फॉर्मूले से जुड़े पटाखों में उत्सर्जन कम करने के लिए बेरियम साल्ट की मात्रा घटाई गई है।
लाइसेंस प्राप्त निर्माता ही बना सकेंगे
कोर्ट के सामने पेश नोट के अनुसार इन खास पटाखों को तभी अनुमति दी जा सकती है जब इन्हें लाइसेंस प्राप्त निर्माता ही तैयार करें। निर्माताओं को निर्धारित शोर सीमा, उत्सर्जन और सुरक्षा नियमों का पालन करना होगा। इन पटाखों में प्रतिबंधित केमिकल नहीं होने चाहिए। पिछले साल दिवाली से पहले दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स 200 के पार चला गया था। इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और नेशनल कैपिटल रीजन में ग्रीन पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल की अनुमति से जुड़ा रास्ता अपनाया था। इस बार भी कोर्ट पटाखों के इस्तेमाल को लेकर स्वास्थ्य और पर्यावरण की चिंताओं को ध्यान में रखकर व्यवस्था तय करने पर विचार कर रहा है।
15 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
इस मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी। तब तक केंद्र सरकार और सीपीसीबी को पटाखों के बेरियम, डेसिबल लेवल और फायर टेस्ट से जुड़े काम आगे बढ़ाने का समय दिया गया है। इस सुनवाई से यह स्पष्ट हुआ कि अदालत पूरे देश में पटाखों पर बैन लगाने के बजाय समय, प्रकार, शोर और उत्सर्जन जैसे पहलुओं के आधार पर संतुलित व्यवस्था पर विचार कर रही है। वहीं, त्योहार के दौरान लोगों की धार्मिक भावनाओं के साथ स्वास्थ्य और पर्यावरण की चिंता को भी अदालत ने महत्वपूर्ण माना है।
