भोपाल के छोटे तालाब में सीवेज रोकने में नाकाम नगर निगम, लग सकता है 2.10 करोड़ का जुर्माना

भोपाल के छोटे तालाब में सीवेज पहुंचने का मामला

छोटे तालाब में सीधे पहुंच रहा सीवेज

भोपाल के छोटे तालाब में बारिशगंगा और एक अन्य नाले के जरिए आने वाला करीब 48 एमएलडी सीवेज अब भी बिना शोधन के सीधे तालाब में मिल रहा है। यह जानकारी नगर निगम की ओर से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी में पेश की गई रिपोर्ट में सामने आई है। मामले में एनजीटी के निर्देश के आधार पर मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 21 महीने की अवधि के लिए पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का आकलन किया है। एमपीपीसीबी ने 21 मार्च से 21 दिसंबर 2025 तक की अवधि के लिए 2.10 करोड़ रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का आकलन किया है। हालांकि यह राशि अभी एनजीटी की ओर से अंतिम रूप से तय नहीं की गई है। यदि एनजीटी इसे मंजूर करता है तो नगर निगम पर छोटे तालाब में सीवेज मिलने के मामले में 2.10 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है।

37 नालों का इंटरसेप्शन पूरा होने का दावा

एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच में याचिकाकर्ता राशिद नूर खान की याचिका पर सुनवाई के दौरान रिपोर्ट पेश की गई। रिपोर्ट में बताया गया कि छोटे तालाब में जाने वाले 37 नालों को इंटरसेप्ट कर एसटीपी की ओर डायवर्ट किया जा चुका है। इसके बावजूद बारिशगंगा नाले से छह एमएलडी और पुराने मछलीघर के पास से करीब दो एमएलडी सीवेज सीधे तालाब में मिलने की बात रिपोर्ट में सामने आई है। इस तरह नालों को इंटरसेप्ट किए जाने के बावजूद तालाब में सीवेज पहुंचने की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। एनजीटी ने नगर निगम से वेटलैंड की सुरक्षा, जलस्रोतों में अनुपचारित पानी की निकासी रोकने और वेटलैंड क्षेत्र में अनधिकृत निर्माण हटाने को लेकर भी कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। इसके लिए 15 दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।

2.10 करोड़ की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का आकलन

मामले में एमपीपीसीबी ने पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का आकलन किया है। 21 महीने की अवधि के लिए 2.10 करोड़ रुपये की राशि तय की गई है। यह राशि एनजीटी की ओर से अंतिम रूप से तय नहीं हुई है। रिपोर्ट में यह संभावना सामने आई है कि नगर निगम पर 2.10 करोड़ रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाई जा सकती है। एनजीटी की सुनवाई के दौरान पेश रिपोर्ट में बताया गया कि सीवेज के उपचार के लिए 10 एमएलडी क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का काम शुरू कर दिया गया है। इसका निर्माण 11 सितंबर 2026 को शुरू हुआ और इसे 31 दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह व्यवस्था उन दोनों नालों से आने वाले सीवेज के उपचार के लिए तैयार की जा रही है, जिनका पानी अभी तालाब में पहुंचने की बात रिपोर्ट में कही गई है।

तालाब की सुरक्षा को लेकर निर्देश

एनजीटी ने नगर निगम को वेटलैंड की सुरक्षा के साथ-साथ जलस्रोतों में अनुपचारित पानी की निकासी रोकने और वेटलैंड क्षेत्र में अनधिकृत निर्माण हटाने को लेकर कार्रवाई करने को कहा है। इसके लिए 15 दिन में कार्रवाई रिपोर्ट मांगी गई है। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी। उस सुनवाई में रिपोर्ट और अब तक की गई कार्रवाई पर आगे विचार किया जाएगा। इस बीच सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण जारी रहेगा। नगर निगम ने ट्रिब्यूनल को बताया कि दोनों नालों के सीवेज के उपचार के लिए 10 एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का काम शुरू हो चुका है। प्लांट को तय समयसीमा में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

समस्या खत्म करने के लिए चल रहा निर्माण

छोटे तालाब में सीवेज जाने की समस्या को रोकने के लिए एसटीपी का निर्माण किया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार प्लांट का निर्माण सितंबर 2026 में शुरू हुआ। इसे दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस व्यवस्था के पूरा होने के बाद बारिशगंगा और पुराने मछलीघर क्षेत्र से तालाब में पहुंचने वाले सीवेज के उपचार की व्यवस्था की जा सकेगी। अभी रिपोर्ट में इन दोनों स्थानों से सीवेज के सीधे तालाब में मिलने की जानकारी दी गई है। छोटे तालाब से जुड़े इस मामले में एनजीटी की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी। तब तक नगर निगम को वेटलैंड और जलस्रोतों की सुरक्षा से जुड़े निर्देशों पर कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करनी होगी।

कार्रवाई रिपोर्ट का इंतजार

एनजीटी ने नगर निगम से वेटलैंड की सुरक्षा और अनुपचारित पानी की निकासी रोकने को लेकर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। साथ ही वेटलैंड क्षेत्र में अनधिकृत निर्माण हटाने को लेकर भी 15 दिन में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, 2.10 करोड़ रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का आकलन सामने आया है, लेकिन यह राशि अभी अंतिम नहीं है। मामले की अगली सुनवाई में इस पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। इस बीच सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण जारी है। नगर निगम के अनुसार 10 एमएलडी क्षमता वाले प्लांट को 31 दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

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