उज्जैन मस्जिद विवाद पर पथराव-लाठीचार्ज, याचिका खारिज; 7 पर FIR

उज्जैन शाही मस्जिद विवाद में पथराव और लाठीचार्ज

हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की

उज्जैन में शाही मस्जिद मामले को लेकर दायर याचिका मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। इंदौर बेंच ने कहा कि सड़क चौड़ीकरण का काम जारी रहेगा। कोर्ट ने मस्जिद के एक हिस्से को तोड़ने की अनुमति देने वाले आदेश पर रोक लगाने से भी इनकार कर दिया। इससे पहले इसी मस्जिद का एक हिस्सा तोड़े जाने पर सोमवार सुबह जमकर हंगामा हुआ था। पुलिस पर पथराव किया गया, जिसके जवाब में लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। भीड़ को हटाने के दौरान महिला थाना प्रभारी भी घायल हो गईं। विवाद के बाद मौके पर पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई, लेकिन दोपहर होते-होते फिर पथराव शुरू हो गया। पुलिस ने दोबारा लाठीचार्ज किया और आंसू गैस छोड़ी। हालांकि, नमाज के समय कार्रवाई रोक दी गई और इसके बाद मामला शांत हुआ।

15 लोग हिरासत में, 7 पर FIR

हंगामे के बाद पुलिस ने 15 लोगों को हिरासत में लिया है। 7 लोगों के खिलाफ FIR की गई है। इन आरोपियों में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर भी शामिल हैं। इन पर माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाया गया है। प्रशासन की कार्रवाई और पुलिस बल की तैनाती के बीच इलाके में स्थिति पर नजर रखी गई। विवाद के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ा और पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा। इसके बाद कार्रवाई जारी रही। नमाज के समय इसे रोक दिया गया था, जिसके बाद स्थिति सामान्य हुई।

सड़क चौड़ीकरण के दायरे में मस्जिद का हिस्सा

सिंहस्थ प्रोजेक्ट के तहत उज्जैन में कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक करीब डेढ़ किलोमीटर क्षेत्र की सड़क को 15 मीटर चौड़ा किया जाएगा। इसके लिए 323 मकान तोड़े जाएंगे। इनमें 15 धर्मस्थल भी शामिल हैं। अब तक 12 धर्मस्थल हटाए जा चुके हैं। सड़क के दायरे में शाही मस्जिद का भी करीब 9 फीट लंबा और 4 फीट चौड़ा हिस्सा आ रहा है। दस्तावेज में इस मस्जिद के 100 साल से ज्यादा पुरानी होने की पुष्टि होती है, हालांकि इमाम का दावा है कि यह 600 साल से ज्यादा पुरानी है। इसी पुराने होने के दावे को लेकर भी विवाद के बीच अलग-अलग पक्ष अपनी बात रख रहे हैं।

दोनों पक्षों के बीच समझौते को लेकर अलग-अलग दावे

याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उज्जैन में काफी अव्यवस्था है। वर्तमान स्थिति यह है कि दोनों रिट अपीलों में प्रशासन, प्रतिवादी और वर्तमान याचिकाकर्ता के बीच समझौता हो गया है। उन्होंने कहा कि समिति को प्रशासन के साथ उचित तरीके से चर्चा करने दी जाए। वहीं प्रतिवादी की ओर से कहा गया कि कोई समझौता नहीं हुआ है। एकल पीठ के आदेश के बाद मस्जिद प्रशासन को उक्त हिस्से को स्वयं हटाने का अवसर दिया गया था। उनके अनुसार निर्माण हटाना शुरू कर दिया गया है। काजी भी मीडिया में बयान दे रहे हैं और सहयोग की अपील कर चुके हैं।

मस्जिद को लेकर मुस्लिम समाज और प्रशासन का पक्ष

भोपाल मध्य सीट से विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि प्रशासन को ऐसी तैयारी करनी चाहिए थी, जिससे मंदिर और मस्जिद दोनों को हटाने की स्थिति नहीं बनती। मुस्लिम समाज मस्जिद की मीनार हटाने के बजाय करीब 3 फीट जगह देने को तैयार है। मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सनवर पटेल ने कहा कि शाही मस्जिद को न तो शहीद किया जा रहा है और न ही विस्थापित किया जा रहा है। इस तरह सड़क चौड़ीकरण और मस्जिद के हिस्से को लेकर प्रशासन, मस्जिद प्रबंधन और अन्य पक्षों के बीच अलग-अलग बातें सामने आई हैं।

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