तुकाराम मुंढे का स्ट्रीट फूड पर बड़ा बयान, बोले- कारोबार बंद करना मकसद नहीं
कारोबार बंद करना नहीं, व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना मकसद
नई दिल्ली। महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने स्ट्रीट फूड को लेकर कहा है कि भारत में खाने की समृद्ध संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता के मानकों को सुनिश्चित करना जरूरी है। उनका कहना है कि सरकार का उद्देश्य किसी कारोबार को बंद करना नहीं, बल्कि उसे सुरक्षित और आजीविका के लिहाज से व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना है।
तुकाराम मुंढे ने इकनॉमिक टाइम्स से बातचीत में कहा कि छोटे फूड वेंडर्स की आजीविका महत्वपूर्ण है, लेकिन लोगों के स्वास्थ्य से समझौता नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक कारोबार को बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए, लेकिन इसके साथ साफ-सफाई और सही तरीके से भोजन तैयार करने के नियमों का पालन भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। उनका जोर इस बात पर है कि खाने की गुणवत्ता, स्वच्छता और लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कारोबार को व्यवस्थित किया जाए। इसके साथ ही छोटे कारोबारियों और वेंडर्स की आजीविका भी प्रभावित न हो।
वेंडिंग के लिए तय जगहों और जोनिंग पर जोर
तुकाराम मुंढे ने स्ट्रीट फूड कारोबार के लिए तय जगहों और जोनिंग की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने मुंबई की चौपाटी और खाऊ गलियों का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे निर्धारित क्षेत्रों में स्वच्छता और दूसरी जरूरी सुविधाओं को बेहतर तरीके से बनाए रखा जा सकता है। उनके मुताबिक फुटपाथ पैदल चलने वालों के लिए होते हैं और हर जगह वेंडिंग की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसी तरह रेलवे स्टेशनों पर भी निर्धारित स्थान होने के बावजूद कई लोग बाहर कारोबार करते हैं। ऐसे मामलों को व्यवस्थित तरीके से देखने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि जिस तरह सब्जी बाजारों के लिए निर्धारित जगह बनाई जाती है, उसी तरह स्ट्रीट फूड कारोबार के लिए भी व्यवस्थित वेंडिंग जोन बनाए जा सकते हैं। इससे वेंडर्स को कारोबार के लिए जगह मिलेगी और ग्राहकों को साफ-सुथरे माहौल में खाना उपलब्ध कराया जा सकेगा।
कारोबार और सार्वजनिक स्वास्थ्य के बीच संतुलन जरूरी
तुकाराम मुंढे के बयान में छोटे कारोबारियों की आजीविका और लोगों के स्वास्थ्य, दोनों के बीच संतुलन बनाने पर जोर दिया गया है। उनका कहना है कि कारोबार को रोकना समाधान नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था जरूरी है जिसमें वेंडर्स नियमों का पालन करते हुए काम कर सकें। खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता के मानकों को बनाए रखने के साथ शहर की योजना और सार्वजनिक स्थानों का भी ध्यान रखना जरूरी है। निर्धारित क्षेत्रों में कारोबार होने से साफ-सफाई, निगरानी और दूसरी सुविधाओं को व्यवस्थित किया जा सकता है। इस तरह व्यवस्था बनाने से कारोबार करने वालों को भी एक निश्चित स्थान मिलेगा और ग्राहकों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए बेहतर वातावरण तैयार किया जा सकेगा। मुंढे ने साफ किया कि पब्लिक हेल्थ को नजरअंदाज किए बिना कारोबार को आगे बढ़ाने की जरूरत है।
नियमों के साथ छोटे कारोबार को अवसर
तुकाराम मुंढे ने यह भी कहा कि छोटे फूड वेंडर्स के लिए नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन उनका उद्देश्य कारोबार बंद कराना नहीं है। खाद्य कारोबार के लिए स्वच्छता, सुरक्षित भोजन और उचित व्यवस्था जरूरी है। उनके अनुसार शहर में ऐसे क्षेत्र तय किए जा सकते हैं जहां वेंडिंग गतिविधियों को व्यवस्थित तरीके से चलाया जाए। इससे पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ सुरक्षित रखने, ग्राहकों को बेहतर माहौल देने और खाद्य स्वच्छता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। स्ट्रीट फूड भारत की खान-पान संस्कृति का हिस्सा है और बड़ी संख्या में लोग इससे जुड़े कारोबार पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में व्यवस्था का उद्देश्य कारोबार को खत्म करने के बजाय उसे सुरक्षित, स्वच्छ और व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने का होना चाहिए।
