रात 10 बजे खुला राजस्थान हाईकोर्ट, रात 2 बजे तक चली सुनवाई; पार्षदों की गिरफ्तारी पर रोक

राजस्थान हाईकोर्ट में रात में सुनवाई

राजस्थान हाईकोर्ट ने इतिहास में पहली बार रात में सुनवाई की। पार्षदों की गिरफ्तारी के मामले में रविवार रात करीब 10 बजे शुरू हुई सुनवाई रात 2 बजे तक चली। इस दौरान कोर्ट ने हनुमानगढ़ के 9 और बीकानेर के एक पार्षद की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। सोमवार को होने वाले चुनाव से ठीक पहले कुछ पार्षदों और प्रत्याशियों के खिलाफ दर्ज मामलों में गिरफ्तारी की आशंका को लेकर हाईकोर्ट में तत्काल राहत की मांग करते हुए याचिकाएं पेश की गई थीं।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डॉ. संजय कुमार अग्रवाल के निर्देश पर रविवार को विशेष पीठों का गठन किया गया। रविवार देर शाम हनुमानगढ़ के नौ पार्षदों की याचिका दाखिल होने के बाद जस्टिस नूपुर भाटी की एकलपीठ गठित हुई। इसके बाद रात 10 बजे सुनवाई शुरू हुई। इस तरह राजस्थान हाईकोर्ट में रात के समय न्यायिक कार्यवाही हुई और पार्षदों की गिरफ्तारी से जुड़े मामले में तत्काल सुनवाई की गई।

हनुमानगढ़ में 60 सीटों में से भाजपा की 15 सीटें

मामले की सुनवाई के दौरान हनुमानगढ़ नगर निकाय के चुनावी समीकरण का भी उल्लेख किया गया। 60 सीटों में से भाजपा की 15 सीटें हैं, जबकि निर्दलीय विधायक गणेश बंसल के 32 पार्षद जीते हैं। गणेश बंसल को 23 साल पुराने पट्टा मामले में बीकानेर से गिरफ्तार किया गया था। इस गिरफ्तारी के बाद पार्षदों और चुनाव में मतदान से जुड़े मामलों को लेकर न्यायालय में तत्काल राहत की मांग की गई।

बीकानेर पार्षद मकसूद अहमद को भी राहत

बीकानेर वार्ड 18 के कांग्रेसी पार्षद और पूर्व यूआईटी अध्यक्ष मकसूद अहमद की गिरफ्तारी पर भी रोक लगाने का आदेश दिया गया। साथ ही उन्हें मतदान करने की अनुमति दी गई। रविवार को सीजे की विशेष अनुमति से जस्टिस सुनील बेनीवाल ने इस मामले की सुनवाई की। मकसूद अहमद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. सचिन आचार्य ने याचिका दाखिल की थी। याचिका में बताया गया कि एक पुराने विवाद में दर्ज केस में पूछताछ के लिए पुलिस ने उन्हें बुलाया था और आशंका थी कि उन्हें वोट देने से रोका जा सकता है।

इससे पहले दिन में कोर्ट ने कुचेरा, नागौर नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष और पार्षद तेजपाल मिर्धा तथा श्रीविजयनगर नगरपालिका के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी सुशील मीढा उर्फ बिट्ट मीठा की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी थी। इस प्रकार निकाय चुनाव से पहले गिरफ्तारी को लेकर सामने आए अलग-अलग मामलों में न्यायालय ने याचिकाओं पर सुनवाई की।

पार्षदों पर दबाव बनाने का आरोप

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि निकायों और निगमों में सभापति और मेयर के चुनाव जीतने के लिए भाजपा पर साम-दाम-दंड-भेद अपनाते हुए निर्दलीय और कांग्रेसी पार्षदों पर दबाव बनाने का आरोप लगाया गया। यह एक आरोप के रूप में रिपोर्ट किया गया है। वहीं, श्रीगंगानगर में भाजपा प्रत्याशी लक्की समर्थकों को धमकाने के मामले में संजय मूंदड़ा, अशोक चांडक और मुकेश की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी होती रही। हालांकि, चांडक को कोर्ट से राहत मिल गई।

जयपुर, कोटा और जोधपुर में 25 सितंबर को मतदान होने हैं। ऐसे में निकाय चुनाव से पहले गिरफ्तारी की आशंका से जुड़े मामलों ने न्यायालय में तत्काल सुनवाई की स्थिति बनाई। राजस्थान हाईकोर्ट में रात 10 बजे शुरू हुई सुनवाई रात 2 बजे तक चली और इस दौरान हनुमानगढ़ के 9 तथा बीकानेर के एक पार्षद की गिरफ्तारी पर रोक लगाई गई। इससे पहले भी संबंधित मामलों में अंतरिम राहत के आदेश दिए गए थे।

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