सत्य निकेतन हादसे पर NSUI का हल्लाबोल, पूछा- जिम्मेदार कौन?

सत्य निकेतन हादसे के विरोध में NSUI कार्यकर्ताओं और छात्रों का प्रदर्शन

मथुरा

सत्य निकेतन हादसे के विरोध में NSUI का प्रदर्शन

एनएसयूआई कार्यकर्ताओं और छात्रों ने दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए इमारत हादसे के विरोध में मंगलवार सुबह करीब 11 बजे बीएसए कॉलेज के बाहर प्रदर्शन किया। छात्रों ने हादसे पर गुस्सा जताते हुए घटना की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग की। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी और उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। छात्रों ने कहा कि घटना बेहद गंभीर है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सत्य निकेतन हादसा एक गंभीर घटना है। छात्रों के अनुसार, हादसे में मरने वालों की संख्या सात तक पहुंच गई है।

जर्जर भवनों पर समय रहते कार्रवाई की मांग

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जर्जर और असुरक्षित भवनों के खिलाफ समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा हो सकती हैं। छात्रों ने राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा। इसमें घटना की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और देशभर में जर्जर भवनों को चिन्हित कर तुरंत सुरक्षा कदम उठाने की मांग की गई। छात्रों का कहना था कि भवनों की खराब स्थिति को नजरअंदाज करने से गंभीर हादसे हो सकते हैं। ऐसे में प्रशासन को असुरक्षित भवनों की पहचान कर समय रहते जरूरी कदम उठाने चाहिए।

NSUI कार्यकर्ता हर्ष चौरसिया ने क्या कहा?

एनएसयूआई कार्यकर्ता हर्ष चौरसिया ने कहा कि छात्रों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। किसी भी छात्र या नागरिक की जान प्रशासनिक लापरवाही, भवनों की खराब स्थिति या सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण नहीं जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन को हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से ही ऐसे भवनों की पहचान कर जरूरी कदम उठाने चाहिए। हर्ष चौरसिया के मुताबिक, छात्रों और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन को पहले से सतर्क रहना चाहिए। उनका कहना था कि यदि जर्जर या असुरक्षित भवनों की समय रहते पहचान कर ली जाए और जरूरी कदम उठाए जाएं, तो भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद मिल सकती है।

छात्रा परी कुमारी ने सुरक्षा जांच पर दिया जोर

छात्रा परी कुमारी ने कहा कि जर्जर भवनों को लेकर प्रशासन को गंभीरता से अभियान चलाने की जरूरत है। स्कूल, कॉलेज, कोचिंग संस्थान और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भवनों की सुरक्षा जांच नियमित रूप से होनी चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि यदि किसी भवन में कमी मिलती है, तो उसे तुरंत खाली कराकर मरम्मत या जरूरी कार्रवाई की जानी चाहिए। छात्रों की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जा सकता। परी कुमारी ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर आने वाले छात्रों और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। इसके लिए भवनों की स्थिति की नियमित जांच और कमियां मिलने पर समय रहते कार्रवाई जरूरी है।

जर्जर भवनों के सर्वे की मांग

प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने प्रशासन से सभी जर्जर भवनों का सर्वे कराने, निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने और लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि केवल हादसा होने के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। असुरक्षित भवनों की पहचान पहले से की जानी चाहिए और जहां सुरक्षा संबंधी कमी मिले, वहां तत्काल जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए। छात्रों ने सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर भी प्रशासन से सख्ती बरतने की मांग की। उनका कहना था कि निर्माण कार्यों में नियमों की अनदेखी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन बढ़ाने की चेतावनी

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को बड़े स्तर पर ले जाया जाएगा। छात्रों ने घटना की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और देशभर में जर्जर भवनों को चिन्हित कर सुरक्षा कदम उठाने की मांग दोहराई। प्रदर्शन के जरिए छात्रों ने प्रशासन से यह भी मांग की कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए पहले से प्रभावी कदम उठाए जाएं। अब प्रदर्शनकारियों की मांगों पर प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई होती है, इस पर नजर रहेगी।

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