रिटायरमेंट प्लानिंग 50-30-20 फॉर्मूला: पेंशन बाजार हेड विश्वजीत गोयल के चमत्कारी टिप्स
जीवन प्रत्याशा 75 साल पहुंची, बदलनी होगी ‘पहले खर्च-बाद में बचत’ की आदत
विशेषज्ञ विश्वजीत गोयल ने बताया कि पहले के दौर की तुलना में आज के युवाओं में वित्तीय साक्षरता (फाइनेंशियल लिटरेसी) में काफी सुधार हुआ है, लेकिन उनकी आदतों में एक बहुत बड़ी खामी आ गई है। आज की युवा पीढ़ी में ‘स्पेंडिंग फर्स्ट और सेविंग लेटर’ यानी ‘पहले पूरा खर्च करो और जो बच जाए उसे बचाओ’ का अनियंत्रित कल्चर हावी हो चुका है, जिसे तुरंत बदलना होगा।
उन्होंने आगाह किया कि रिटायरमेंट कोई अनिश्चित घटना नहीं बल्कि जीवन का एक निश्चित पड़ाव है। भारत में औसत जीवन प्रत्याशा (लाइफ एक्सपेक्टेंसी) पहले के 60-62 साल से बढ़कर अब 74-75 वर्ष तक पहुंच चुकी है। इसका अर्थ यह हुआ कि काम बंद करने के बाद भी आपको कम से कम 15 से 20 वर्षों तक अपने जीवन स्तर को बनाए रखने के लिए भारी भरकम फंड की जरूरत पड़ेगी। गोयल ने कहा कि इसके लिए किसी रॉकेट साइंस की आवश्यकता नहीं है, बस थोड़ा सा अनुशासित नजरिया अपनाते ही रिटायरमेंट प्लानिंग फॉर्मूला आसानी से काम करने लगता है।
50:30:20 के फॉर्मूले का उलटा और जादुई इस्तेमाल
विश्वजीत गोयल ने फाइनेंशियल प्लानिंग के प्रसिद्ध नियम ’50:30:20′ को लागू करने का क्रांतिकारी तरीका समझाया। पारंपरिक नियम कहता है कि यदि आप 100 रुपये कमा रहे हैं, तो 50 रुपये अपनी अनिवार्य बुनियादी जरूरतों पर खर्च करें, 30 रुपये अपनी व्यक्तिगत इच्छाओं व मनोरंजन पर लगाएं और बाकी बचे 20 रुपये की बचत करें।
गोयल ने कहा कि यदि आप इस पारंपरिक क्रम में चलेंगे तो अंत में कुछ नहीं बचेगा, क्योंकि हाथ में पैसा रहने पर वह पूरा खर्च हो जाता है। इसलिए इस फॉर्मूले को उलट देना चाहिए। नियम यह होना चाहिए कि जैसे ही 100 रुपये की कमाई हाथ में आए, सबसे पहले 20 रुपये निकाल कर सीधे अपनी बचत और रिटायरमेंट निवेश में सुरक्षित कर लें। इसके बाद बचे हुए 80 रुपये में से 50 रुपये अपनी पारिवारिक जरूरतों पर खर्च करें और अंत में जो बचे, उससे अपनी अतिरिक्त इच्छाएं पूरी करें। इस सुनियोजित रिटायरमेंट प्लानिंग फॉर्मूला के जरिए कोई भी व्यक्ति बुढ़ापे में सम्मानजनक और तनावमुक्त जीवन सुनिश्चित कर सकता है।
