भारत और स्विट्जरलैंड रक्षा और परमाणु ऊर्जा क्षेत्रों में संबंधों को मजबूत करेंगे
रक्षा और परमाणु ऊर्जा सहयोग पर बनी सहमति
भारत और स्विट्जरलैंड ने रक्षा और परमाणु ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई है। यह चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन के बीच हुई मुलाकात के दौरान सामने आई। दोनों नेताओं के बीच यह बैठक सोमवार को हुई। बातचीत में दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ नए क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर भी जोर दिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक के बाद कहा कि दोनों देशों ने सैन्य आदान-प्रदान और रक्षा उत्पादन में सहयोग की नई संभावनाओं की पहचान की है। इसके साथ ही परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करने पर भी सहमति बनी। इस बातचीत को भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया।
प्रवासन और गतिशीलता साझेदारी पर जोर
बैठक में लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड के बीच हस्ताक्षरित प्रवासन और गतिशीलता साझेदारी समझौता तथा युवा पेशेवर समझौता भारतीय छात्रों, शोधकर्ताओं, पेशेवरों और युवाओं के लिए स्विट्जरलैंड में कई नए अवसर खोलेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, समझौता ज्ञापन का उद्देश्य समान व्यवहार के सिद्धांतों के तहत प्रवासन और गतिशीलता सहयोग को विकसित करना तथा राष्ट्रीय कानूनों के अनुसार अनियमित प्रवासन, मानव तस्करी और शोषण को रोकना और उससे निपटना है। इसमें पांच साल तक के लिए बहु-प्रवेश वीजा का प्रावधान है। प्रत्येक यात्रा पर छह महीने तक का प्रवास भी इसमें शामिल है। युवा पेशेवरों के समझौते में प्रत्येक देश से हर साल 300 लोगों के आदान-प्रदान का प्रावधान है। जरूरत पड़ने पर इस संख्या को बढ़ाकर 500 तक किया जा सकता है।
व्यापार और निवेश को लेकर भी हुई चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी ने स्विस राष्ट्रपति पार्मेलिन की भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने कहा कि पिछले अक्टूबर में उनके व्यक्तिगत समर्थन से भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ यानी ईएफटीए देशों के बीच ऐतिहासिक व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता लागू किया गया था। यूरोप के किसी आर्थिक ब्लॉक के साथ भारत का यह पहला एफटीए बताया गया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह समझौता निवेश, नवाचार, रोजगार और साझा समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण योजना है। इसके माध्यम से अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित करने और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है। स्विस राष्ट्रपति पार्मेलिन ने भी व्यापार को महत्वपूर्ण पहलू बताया और कहा कि उनकी भारत यात्रा भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ के बीच व्यापार तथा आर्थिक साझेदारी समझौते के लागू होने की पहली वर्षगांठ के अवसर पर हो रही है।
भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों को नई दिशा
दोनों देशों की बातचीत में रक्षा, परमाणु ऊर्जा, निवेश, प्रवासन और युवाओं के अवसरों जैसे कई क्षेत्रों को प्रमुखता मिली। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग को और गहरा करने पर सहमति बनी है। वहीं, स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति की यात्रा को व्यापार और आर्थिक साझेदारी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बताया गया। इस तरह भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों में सुरक्षा और ऊर्जा के साथ-साथ आर्थिक सहयोग और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की दिशा में भी जोर दिखाई दिया।
