हूती विद्रोहियों का लाल सागर पर कब्जा, वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति पर खतरा

हूती विद्रोही लाल सागर संकट

लाल सागर के अहम इलाके पर कब्जा

यमन के लाल सागर तट पर हूती विद्रोहियों ने मोचा बंदरगाह और आसपास के कुछ द्वीपों पर कब्जा कर लिया है। इन इलाकों की रणनीतिक स्थिति के कारण वैश्विक व्यापार और समुद्री परिवहन को लेकर चिंता बढ़ गई है। हूती विद्रोही का नियंत्रण बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास के इलाके तक प्रभाव डाल सकता है। यह रास्ता दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है।

हूती विद्रोहियों हमलों से पहले इस समुद्री रास्ते से प्रतिदिन करीब 9.3 मिलियन बैरल तेल और पेट्रोलियम उत्पाद गुजरते थे। 2025 तक यह मात्रा घटकर करीब 4.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गई। हूती हमलों के कारण कई जहाजों ने लाल सागर के रास्ते से दूरी बनानी शुरू की। इसका असर वैश्विक शिपिंग लागत और ऊर्जा बाजार पर दिखाई दिया। ईरान के साथ हूती विद्रोहियों के संबंधों को देखते हुए क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को लेकर भी चर्चा बढ़ी है।

सऊदी अरब के लिए भी चुनौती

हार्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के बाद सऊदी अरब ने अपने कच्चे तेल को ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए लाल सागर तक पहुंचाना शुरू किया था। ऐसे में लाल सागर के रास्ते पर बढ़ता खतरा सऊदी तेल निर्यात के लिए भी चुनौती बन सकता है। हूती विद्रोही यदि बाब-अल-मंदेब के आसपास लंबे समय तक नियंत्रण मजबूत करते हैं, तो इसका असर तेल, शिपिंग और वैश्विक व्यापार तीनों पर पड़ सकता है।

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