एसीपी भगत पर यौन उत्पीड़न के आरोप, CJP का प्रदर्शन जारी रखने का ऐलान
महिला पत्रकारों के आरोपों को लेकर CJP का प्रदर्शन
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन को कवर करने के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। इस मामले को लेकर CJP ने संसद मार्ग पुलिस थाने के बाहर प्रदर्शन जारी रखा है। CJP प्रवक्ता और नेता सौरव दास ने आरोप लगाया कि पुलिस उन महिला पत्रकारों में से एक से मिलने को तैयार नहीं है, जिसने एसीपी भगत पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। दास ने पुलिस के रवैये पर सवाल उठाते हुए इसे अस्वीकार्य बताया। सौरव दास ने कहा कि पार्टी तब तक संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन जारी रखेगी, जब तक पुलिस उन्हें कथित पीड़िता से मिलने की अनुमति नहीं देती। उनके मुताबिक, पीड़िता से मुलाकात की अनुमति नहीं मिलने तक प्रदर्शन जारी रहेगा।
CJP ने पुलिस के रवैये पर उठाए सवाल
सौरव दास ने कहा कि CJP संसद मार्ग पुलिस थाने के बाहर प्रदर्शन कर रही है। उनका आरोप है कि पुलिस उस महिला पत्रकार से मिलने के लिए तैयार नहीं है, जिसने एसीपी विवेक भगत पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। दास ने पुलिस के रवैये को स्वीकार्य नहीं बताया। उन्होंने कहा कि जब तक उन्हें अंदर जाकर कथित पीड़िता से मिलने की अनुमति नहीं दी जाती, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा। इस मामले में आरोपों की जांच को लेकर भी कार्रवाई की गई है। दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि तीन महिला पत्रकारों ने 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इसके बाद उनकी शिकायतें निष्पक्ष जांच के लिए अपराध शाखा को भेज दी गईं।
प्रियंका गांधी ने सरकार से पूछे सवाल
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से सवाल किया। उन्होंने पूछा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों द्वारा महिला पत्रकारों के कथित यौन उत्पीड़न पर सरकार ने संज्ञान क्यों नहीं लिया।
प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि दर्जनों पत्रकारों के विरोध प्रदर्शन के बावजूद न तो प्राथमिकी दर्ज की गई और न ही कोई ठोस कार्रवाई की गई। उन्होंने यह भी कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने पुलिस के अभद्र व्यवहार का आरोप लगाया है। दिल्ली पुलिस की ओर से बताया गया कि प्रदर्शनकारियों को BNSS की धारा 163 के तहत जगह खाली करने की चेतावनी दी गई थी। शिकायत के बाद महिलाओं का मेडिकल कराया गया और मामला क्राइम ब्रांच को सौंपा गया। इस तरह एसीपी भगत से जुड़े आरोपों और महिला पत्रकारों की शिकायतों को लेकर राजनीतिक तथा सामाजिक स्तर पर सवाल उठ रहे हैं।
