सुप्रीम कोर्ट बोला- TMC विवाद पर 3 महीने में फैसला दे EC, आयोग ने मांगे थे 6 महीने
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को तीन महीने का समय दिया
सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद पर चुनाव आयोग को तीन महीने में अंतिम फैसला लेने का निर्देश दिया है। चुनाव आयोग ने इस मामले को निपटाने के लिए छह महीने का समय मांगा था, लेकिन कोर्ट ने तीन महीने की समय सीमा तय की। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने दोनों गुटों को अपनी दलीलें और दस्तावेज चार सप्ताह के भीतर चुनाव आयोग के सामने पूरा करने को कहा। इसके बाद आयोग को विवाद पर अंतिम फैसला लेने के लिए तीन महीने का समय मिलेगा। यह मामला ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसमें चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले को चुनौती दी गई थी।
मामला तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके पारंपरिक चुनाव चिह्न ‘फूल और घास’ को लेकर दो गुटों के बीच चल रहे विवाद से जुड़ा है। चुनाव आयोग ने दोनों गुटों की दलीलें सुनने के बाद पार्टी के मूल नाम और चुनाव चिह्न को फिलहाल फ्रीज कर दिया था। इसके बाद दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न दिए गए। एक गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ का चिह्न दिया गया, जबकि दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न दिया गया। दोनों गुट पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव को लेकर चुनावी प्रक्रिया में हैं।
चुनाव आयोग ने मांगा था छह महीने का समय
चुनाव आयोग की ओर से मामले को निपटाने के लिए छह महीने का समय मांगा गया था। आयोग का कहना था कि विवाद से जुड़े दस्तावेजों और दलीलों को देखने के लिए पर्याप्त समय चाहिए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने आयोग की इस मांग को स्वीकार नहीं किया और तीन महीने में अंतिम फैसला लेने का निर्देश दिया। कोर्ट ने दोनों गुटों को चार सप्ताह में अपनी दलीलें पूरी करने को कहा है। इसके बाद चुनाव आयोग को नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े मामले में अंतिम निर्णय लेना होगा। इस दौरान दोनों पक्ष अपने दावे और संबंधित दस्तावेज आयोग के सामने रख सकेंगे।
सुप्रीम कोर्ट में यह सुनवाई ममता बनर्जी की ओर से दायर याचिका पर हुई। याचिका में चुनाव आयोग के उस अंतरिम फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें पार्टी के नाम और पारंपरिक चुनाव चिह्न को फ्रीज किया गया था। सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी के गुट की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलीलें रखीं। उनकी ओर से कहा गया कि चुनाव को रोकने की मांग नहीं की जा रही है, लेकिन पार्टी के मूल नाम और चुनाव चिह्न को बनाए रखने का सवाल महत्वपूर्ण है। इसके बाद कोर्ट ने चुनाव आयोग को विवाद का अंतिम निपटारा तय समय में करने का निर्देश दिया।
उपचुनाव से पहले विवाद का निपटारा जरूरी
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होने हैं। दोनों गुटों की ओर से एक ही नाम और चुनाव चिह्न पर उम्मीदवार उतारने की मांग की गई थी। चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद अलग-अलग नाम और चिह्न आवंटित किए। अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आयोग को तय समय सीमा में अंतिम फैसला लेना होगा। TMC विवाद में कोर्ट ने यह भी कहा कि दोनों पक्ष पहले चार सप्ताह के भीतर अपनी दलीलें पूरी करें और उसके बाद आयोग मामले पर अंतिम निर्णय करे।
चुनाव आयोग ने 18 सितंबर को ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ का चुनाव चिह्न दिया था। वहीं दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न दिया गया। इसके बाद ममता बनर्जी के गुट ने आयोग के अंतरिम फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद आयोग को अंतिम फैसला लेने के लिए तीन महीने की समय सीमा दी है। इस मामले में अगली प्रक्रिया अब दोनों गुटों की ओर से दलील और दस्तावेज दाखिल किए जाने के बाद आगे बढ़ेगी।
