CJI को 2000 से ज्यादा लोगों की चिट्ठी, SIR पर रोक लगाने की मांग; EC की भूमिका पर भी सवाल

CJI सूर्यकांत को SIR पर रोक की मांग वाली चिट्ठी

2000 से ज्यादा नागरिकों ने CJI को लिखा पत्र

देश के 2000 से ज्यादा नागरिकों ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत को पत्र लिखकर SIR की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि SIR की वैधता और इसकी प्रक्रिया की न्यायिक समीक्षा पूरी होने तथा अदालत का फैसला आने तक इस प्रक्रिया को रोका जाना चाहिए। इसके साथ ही पत्र लिखने वालों ने निर्वाचन आयोग की भूमिका पर स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई शुरू करने की अपील भी की है। पत्र में मतदाता सूची से जुड़े कामकाज, चुनाव प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग की भूमिका को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं। पत्र पर अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े लोगों के हस्ताक्षर हैं। इनमें पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल विष्णु भागवत, पूर्व आईएएस अधिकारी अदिति मेहता, वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण, इतिहासकार आदित्य मुखर्जी और अभिनेता प्रकाश राज सहित शिक्षाविद, वकील, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं।

प्रक्रिया की समीक्षा पूरी होने तक रोक की मांग

पत्र में SIR की वैधता और प्रक्रिया की समीक्षा पूरी होने तक इसे रोकने की मांग की गई है। इसमें कहा गया है कि मतदाता पंजीकरण से जुड़े सॉफ्टवेयर और फॉर्म में कथित तौर पर किए गए बदलावों की भी अदालत की निगरानी में जांच कराई जानी चाहिए। पत्र लिखने वालों ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े मामलों पर न्यायिक निगरानी की मांग रखी है। उनका कहना है कि SIR से जुड़े फैसलों और प्रक्रिया की वैधता को स्पष्ट किया जाना जरूरी है। इसी क्रम में पत्र में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य अधिकारियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की मांग भी रखी गई है। साथ ही ECINET की सुरक्षा और कानूनी ऑडिट कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति बनाने की मांग की गई है।

चुनाव आयोग की भूमिका पर स्वत: संज्ञान की अपील

पत्र में सुप्रीम कोर्ट से निर्वाचन आयोग की भूमिका को लेकर स्वत: संज्ञान लेने की अपील भी की गई है। इसमें मतदाता पंजीकरण सॉफ्टवेयर और फॉर्म में कथित अनधिकृत बदलावों की जांच कराने की मांग की गई है। पत्र में यह भी कहा गया है कि ऐसे मामलों की जांच अदालत की निगरानी में होनी चाहिए। इसके अलावा निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा जांच की मांग रखी गई है। पत्र लिखने वालों ने ECINET की सुरक्षा और कानूनी ऑडिट के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने का सुझाव भी दिया है। इस तरह पत्र में सिर्फ SIR को रोकने की मांग नहीं है, बल्कि पूरी प्रक्रिया और उससे जुड़े डिजिटल सिस्टम की जांच की मांग भी शामिल है।

चुनाव आयोग ने अपने फैसलों पर क्या कहा

इसी बीच चुनाव आयोग ने शनिवार को अपनी बैठक में कामकाज और चुनावी व्यवस्था से जुड़े कई फैसले लिए। आयोग ने कहा कि बैठकों से पहले एजेंडा साझा किया जाएगा और बाद में फैसलों का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। आयोग की बैठक में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ दोनों निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी मौजूद रहे। आयोग ने मतदाता सूचियों की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया से जुड़े फैसलों को लेकर उठे सवालों पर भी अपना पक्ष रखा। आयोग की ओर से कहा गया कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।

मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल

पत्र में मतदाता सूची, वोटर रजिस्ट्रेशन सॉफ्टवेयर और फॉर्म से जुड़े कथित बदलावों की जांच की मांग की गई है। हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा है कि SIR की वैधता और प्रक्रिया की समीक्षा जरूरी है। इसी वजह से न्यायिक समीक्षा पूरी होने तक SIR पर रोक लगाने की मांग की गई है। पत्र में निर्वाचन आयोग की भूमिका पर अदालत की ओर से स्वत: संज्ञान लेने की अपील भी की गई है। साथ ही डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा और कानूनी ऑडिट कराने की मांग रखी गई है। पत्र में कहा गया है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े तकनीकी और कानूनी पहलुओं की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।

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