ट्रेन 8 घंटे 48 मिनट लेट, कंज्यूमर कोर्ट ने रेलवे पर लगाया 35 हजार का जुर्माना
ट्रेन की लंबी देरी से यात्री को हुई परेशानी
भारत में ट्रेन का देरी से चलना और गंतव्य स्थान पर देरी से पहुंचना कोई नई बात नहीं है। कई ट्रेनें 8 से 10 घंटे या इससे भी ज्यादा समय के लिए लेट हो जाती हैं। ऐसे में यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं, ऐसे ही एक मामले में यात्री ने रेलवे के खिलाफ कंज्यूमर कोर्ट में केस कर दिया। नतीजा यह हुआ कि रेलवे यह केस हार गया और अब उसे यात्री को 35 हजार रुपये देने होंगे।
दरअसल, ट्रेन की लंबी देरी से एक यात्री को झारखंड में बड़ी राहत मिली है। सरायकेला जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने दक्षिण पूर्व रेलवे को यात्री को 35 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। आयोग ने माना कि ट्रेन के करीब 9 घंटे लेट होने से यात्री को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा। मामला सितंबर 2024 का है। शिकायतकर्ता ने टाटानगर से संबलपुर जाने के लिए इस्पात एक्सप्रेस में स्लीपर क्लास की दो टिकट बुक की थीं। ट्रेन को टाटानगर से सुबह 10:18 बजे रवाना होकर दोपहर 3:50 बजे संबलपुर पहुंचना था। हालांकि, ट्रेन तय समय के अनुसार नहीं पहुंची।
ट्रेन 8 घंटे 48 मिनट देरी से पहुंची
ट्रेन टाटानगर से सुबह 10:18 बजे रवाना हुई, लेकिन संबलपुर पहुंचने में 528 मिनट यानी ट्रेन 8 घंटे लेट होने से भी ज्यादा की देरी हुई। ट्रेन दोपहर 3:50 बजे पहुंचने के बजाय काफी देर बाद गंतव्य पर पहुंची। इस लंबी देरी के कारण यात्री को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा।
इसके बाद यात्री ने रेलवे अधिकारियों को कानूनी नोटिस भेजा। साथ ही उसने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कर 4.50 लाख रुपये मुआवजे की मांग की। यात्री का कहना था कि ट्रेन की देरी के कारण उसे परेशानी उठानी पड़ी और इसका असर उसके समय तथा आर्थिक स्थिति पर भी पड़ा। रेलवे ने यात्री की शिकायत का विरोध किया। रेलवे की ओर से कहा गया कि यात्री ऐसा कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका, जिससे देरी के संभावित असर के कारण हुए वास्तविक आर्थिक नुकसान का आकलन किया जा सके। रेलवे ने अपनी ओर से मामले में अलग तर्क भी रखे।
आयोग ने रेलवे को माना जिम्मेदार
मामले की सुनवाई के दौरान सरायकेला जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने रेलवे को जिम्मेदार माना। आयोग ने कहा कि ट्रेन के करीब 9 घंटे लेट होने से यात्री को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक परेशानी हुई। इसके बाद आयोग ने दक्षिण पूर्व रेलवे को यात्री को कुल 35 हजार रुपये देने का आदेश दिया।
आदेश के तहत 30 हजार रुपये मुआवजे के तौर पर और 5 हजार रुपये मुकदमे के खर्च के तौर पर देने होंगे। इस तरह यात्री की शिकायत पर रेलवे को कुल 35 हजार रुपये का भुगतान करना होगा। इस मामले में आयोग के फैसले के बाद रेलवे को यात्री को राहत राशि देनी होगी। वहीं, यह मामला ट्रेन की लंबी देरी के कारण यात्री को हुई परेशानी और उसके बाद उपभोक्ता आयोग में पहुंची शिकायत से जुड़ा है।
