गणपति स्थापना में कलश क्यों जरूरी? जानें कलश में रखी जाने वाली 7 चीजें
गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन घरों और पंडालों में विधि-विधान से गणपति की स्थापना की जाती है। इस बार गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर दिन सोमवार को मनाया जाएगा। हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को घरों और पंडालों में गणेशजी की स्थापना की जाती है और पर्व की शुरुआत हो जाती है। 10 दिन तक चलने वाले इस पर्व का समापन भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि यानी अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन के साथ हो जाता है।
गणपति स्थापना की पूजा में मूर्ति के साथ कलश स्थापना का भी विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कलश को शुभता, समृद्धि और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता कहा जाता है। मान्यता है कि किसी भी शुभ कार्य से पहले गणेशजी की पूजा करने से कार्य में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।
गणपति स्थापना के लिए कैसे रखें कलश
धार्मिक मान्यताओं में कलश को मंगल, शुभता और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। गणेश स्थापना के समय पूजा स्थल को साफ करके चौकी पर कलश रखें। गणेश स्थापना से पहले पूजा स्थल की शुद्धि करके कलश की स्थापना की जाती है। कलश में शुद्ध जल भरें और उसमें अक्षत, गंगाजल, सुपारी व सिक्का डालें। कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते रखें और ऊपर नारियल स्थापित करें। कलश के पास भगवान गणेश की मूर्ति रखें। इसके बाद कलश और गणपति का विधिवत पूजन करें।
कलश में रखी जाने वाली 7 चीजें
गणपति स्थापना की पूजा में कलश में रखी जाने वाली सात चीजों में स्वच्छ जल, अक्षत यानी चावल, सुपारी, सिक्का, गंगाजल, आम या अशोक के पत्ते और नारियल का उल्लेख किया गया है।
कलश में जल जीवन और ऊर्जा का प्रतीक है, जबकि नारियल पूर्णता और शुभता का प्रतीक माना जाता है। कलश की स्थापना से पूजा स्थल को पवित्र और सकारात्मक बनाने की परंपरा है। गणेश चतुर्थी पर गणपति स्थापना के दौरान कलश को भगवान गणेश के समीप रखा जाता है। कई परिवारों में कलश को पूजा की शुरुआत में स्थापित किया जाता है और इसके बाद गणेश जी का आह्वान, संकल्प और पूजन किया जाता है।
क्यों जरूरी माना जाता है कलश?
हिंदू पूजा पद्धति में कलश को देवताओं का प्रतीक माना जाता है। गणेशजी की स्थापना से पहले पूजा स्थल की शुद्धि करके कलश स्थापित किया जाता है। सामान्यतः मिट्टी, तांबे या पीतल के कलश में जल भरकर उसके ऊपर आम या अशोक के पत्ते और नारियल रखा जाता है।
गणपति स्थापना के लिए कलश और उसमें रखी जाने वाली सामग्री अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों की धार्मिक परंपराओं के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है। इस प्रकार कलश और गणपति स्थापना का संबंध पूजा की पवित्रता, शुभता और मंगलकामना से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से की गई गणेश पूजा से भगवान गणेश जीवन से विघ्न दूर करते हैं।

