सुप्रीम कोर्ट के फैसले अब आसान हिंदी में सुनकर भी समझ सकेंगे
जन सूचना सेवा के जरिए आसान होगी जानकारी
सुप्रीम कोर्ट ने हिंदी दिवस के मौके पर जल्द “जन सूचना सेवा” शुरू करने की घोषणा की है। इसके तहत कोर्ट के बड़े फैसलों और आदेशों का सार आसान हिंदी में छोटे ऑडियो और वीडियो बुलेटिन के जरिए लोगों तक पहुंचाया जाएगा। यानी जिन लोगों को कानूनी भाषा में लिखे फैसले पढ़ने और समझने में परेशानी होती है, वे उन्हें सुनकर और देखकर भी समझ सकेंगे। इस पहल का मकसद सुप्रीम कोर्ट के फैसले आम लोगों की समझ में लाना है।
शुरुआत हिंदी से, बाद में दूसरी भारतीय भाषाओं में सेवा
जन सूचना सेवा की शुरुआत हिंदी से होगी और बाद में यह सेवा दूसरी भारतीय भाषाओं में भी उपलब्ध कराई जाएगी। कोर्ट ने इस पहल में दिव्यांगजनों तक न्यायिक जानकारी की आसान पहुंच को भी खास महत्व दिया है।
“जन सूचना सेवा” में सुप्रीम कोर्ट के अहम फैसलों और आदेशों का सार आसान हिंदी में बताया जाएगा। इसके लिए छोटे ऑडियो और वीडियो बुलेटिन तैयार किए जाएंगे, ताकि लोग जटिल कानूनी भाषा में जाए बिना फैसले की मुख्य बात समझ सकें।
पहले से उपलब्ध हिंदी सामग्री से क्या अलग होगा?
क्या सुप्रीम कोर्ट के फैसले अब तक हिंदी में नहीं मिलते थे? ऐसा नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों के हिंदी संस्करण पहले से उपलब्ध कराए जाते रहे हैं। कोर्ट की वेबसाइट पर हिंदी में कंटेंट भी मौजूद है। हालांकि, आम लोगों तक न्यायिक जानकारी पहुंचाने के लिए भारतीय भाषाओं में अनुवाद और दूसरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती रही हैं।
नई पहल में फर्क यह है कि फैसलों को केवल ट्रांसलेशन के रूप में देने के बजाय आसान और बोलचाल की हिंदी में ऑडियो-वीडियो के जरिए समझाया जाएगा।
कानूनी भाषा समझने में होने वाली परेशानी कम होगी
यह पहल क्यों जरूरी है? अदालतों के फैसलों में कानूनी शब्दावली और जटिल भाषा का इस्तेमाल होता है। ऐसे में आम व्यक्ति के लिए फैसला पढ़कर उसका मतलब समझना मुश्किल हो सकता है।

