बालाघाट में 32 बच्चों की मौत, हर रोज 60 बीमार: डिस्चार्ज के बाद फिर तेज बुखार

बालाघाट में बीमारी से प्रभावित आदिवासी बच्चे

तीन महीने में 32 बैगा आदिवासी बच्चों की मौत

भोपाल, बालाघाट में बीते तीन महीने में एक संदिग्ध बीमारी से 32 बैगा आदिवासी बच्चों की मौत हो चुकी है। स्थानीय लोगों का दावा है कि मौतों का आंकड़ा सरकारी आंकड़े से कहीं ज्यादा है। टीम प्रभावित गांवों में पहुंची तो बीमारी और मौतों का खौफ साफ दिखाई दिया। बालाघाट से करीब 85 किलोमीटर दूर जंगलों के बीच से गुजरते हुए टीम अड़ोरी गांव पहुंची। गांव के चौराहे पर चार बैगा आदिवासी महिलाएं आपस में बात कर रही थीं। दो महिलाओं ने कमर पर कपड़े के सहारे बच्चे लटका रखे थे। पूछा गया- बच्चे स्वस्थ हैं? जवाब मिला- अभी तक तो ठीक हैं, आगे का पता नहीं।

प्रभावित गांवों में बीमारी का असर

मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आने के बाद जिला प्रशासन प्रभावित क्षेत्र में लगातार सक्रिय है। स्कूलों में चहल-पहल है, आंगनबाड़ियों में काम हो रहा है और बच्चों के लिए खाना बनाया जा रहा है। कई परिवारों तक साफ पानी पहुंचाने की व्यवस्था भी की गई है। अड़ोरी से करीब 7 किलोमीटर आगे कुंडेकसा गांव है। सुबह करीब 10 बजे सड़क किनारे बने माध्यमिक स्कूल में दर्जनों महिलाएं बच्चों के साथ पहुंच रही थीं। यहीं अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र और दस्तावेज बनाने का कैंप लगाया गया है। ज्यादातर बच्चों के जन्म प्रमाणपत्र, आधार कार्ड और समग्र आईडी नहीं बनी थी। अब दस्तावेज तैयार कराने के लिए महिलाओं की भीड़ लगी है। इसी स्वास्थ्य केंद्र में बीमार बच्चे भी लगातार पहुंच रहे हैं। कई बच्चों के शरीर पर दाने और फफोले दिखाई दिए।

डिस्चार्ज के बाद फिर तेज बुखार

प्रभावित क्षेत्र में बीमारी को लेकर लोगों में चिंता बनी हुई है। बच्चों के बीमार होने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। डिस्चार्ज होने के बाद फिर तेज बुखार आने की बात भी सामने आई है। मीजल्स और मलेरिया के पॉजिटिव केस भी बताए गए हैं। प्रशासन प्रभावित क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था को सक्रिय रखे हुए है। स्कूलों और आंगनबाड़ियों में काम जारी है। स्वास्थ्य केंद्र पर बीमार बच्चों की जांच और उपचार की व्यवस्था की जा रही है। कई परिवारों तक साफ पानी पहुंचाने की व्यवस्था भी की गई है।

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