एमपी में 14,981 सरकारी बसों का मास्टर प्लान तैयार

मध्यप्रदेश में सरकारी बसों के संचालन का मास्टर प्लान

3,636 रूटों पर 14,981 बसों का लक्ष्य

मध्यप्रदेश में नागरिकों को बेहतर और सुगम सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराने के लिए अगले पांच साल का मास्टर प्लान तैयार किया गया है। इसके तहत प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से 14,981 बसों के संचालन का लक्ष्य रखा गया है। ये बसें कुल 3,636 इंटरसिटी और इंट्रासिटी रूटों पर चलेंगी। यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की शुरुआत की गई है और इसका लगातार विस्तार किया जाएगा।

परिवहन व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को मंत्रालय से कलेक्टर और पुलिस अधीक्षकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से जिलों में बस स्टैंड, डिपो, बस स्टॉप और ट्रैफिक व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए कहा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यात्रियों को परिवहन सुविधा देने के लिए अलग-अलग विभागों और एजेंसियों के बीच आवश्यक समन्वय बना रहना चाहिए।

अगले पांच साल में चरणबद्ध विस्तार

मास्टर प्लान के तहत अगले पांच वर्षों में चरणबद्ध तरीके से बसों का संचालन बढ़ाया जाएगा। वर्तमान में उपलब्ध बसों के साथ-साथ पहले से संचालित फिट बसों का उपयोग भी किया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य यात्रियों को विभिन्न क्षेत्रों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है। सरकार की योजना के अनुसार आने वाले वर्षों में सरकारी बसें विभिन्न इंटरसिटी और इंट्रासिटी रूटों पर यात्रियों को सुविधा देंगी।

अधिकारियों को यह भी कहा गया है कि बसों के संचालन में किसी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए संबंधित थाना पुलिस और ट्रैफिक पुलिस का सहयोग लिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि परिवहन व्यवस्था केवल बसों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। बसों के सुचारू संचालन के लिए बस स्टैंड, डिपो, स्टॉप और यातायात व्यवस्था को भी व्यवस्थित करना जरूरी है। इसी उद्देश्य से जिला स्तर पर परिवहन सलाहकार समितियों की नियमित बैठकें कराने के निर्देश दिए गए हैं।

बस स्टैंड और डिपो को किया जाएगा व्यवस्थित

बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि पुराने और बंद पड़े बस डिपो या टर्मिनल में स्वच्छता अभियान चलाकर जरूरी सुविधाएं विकसित की जाएं। जिन स्थानों पर बस स्टैंड या बस स्टॉप समाप्त हो चुके हैं, वहां उपलब्ध जमीन पर नई सुविधाएं विकसित करने के निर्देश दिए गए। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बसों के निर्बाध संचालन के लिए थाना पुलिस और ट्रैफिक पुलिस का सहयोग सुनिश्चित करने को कहा गया है। इसके अलावा जिला स्तरीय परिवहन सलाहकार समितियों की नियमित बैठकें भी आयोजित की जाएंगी। कलेक्टरों को क्षेत्रीय परिवहन व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों के साथ नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य परिवहन उपक्रम की ओर से जिला स्तरीय परिवहन सलाहकार समितियों के सामने रूट प्रस्तुत करने और उनके सुझाव लेने की प्रक्रिया भी सुनिश्चित करने को कहा गया है।

निजी बस ऑपरेटरों को भी प्रोत्साहन

परिवहन व्यवस्था में निजी बस ऑपरेटरों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना गया है। परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि निजी बस ऑपरेटरों को आवश्यक प्रोत्साहन दिया जा रहा है। यात्रियों से मिलने वाले सुझावों के आधार पर व्यवस्थाओं में सुधार किया जाएगा। बसों की फिटनेस और परमिट की शर्तों की जांच के लिए मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। निजी बसों की फिटनेस, परमिट की शर्तों, चालकों के संचालन और व्यवहार की नियमित जांच की व्यवस्था की जाएगी। इसका उद्देश्य यात्रियों के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराना है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि बस ऑपरेटर नियमों का पालन करते हुए बसों का संचालन करें और यात्रियों को बेहतर सेवा मिले।

यात्रियों के सुझावों पर होगा सुधार

सरकार ने परिवहन व्यवस्था में सुधार के लिए यात्रियों के सुझावों को भी महत्वपूर्ण माना है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि यात्रियों की ओर से मिलने वाले सुझावों को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाओं में जरूरी बदलाव किए जाएं। सरकारी बसें चलाने की योजना में केवल नए रूट शुरू करने पर ही ध्यान नहीं दिया जा रहा, बल्कि मौजूदा परिवहन व्यवस्था को भी बेहतर बनाने की तैयारी है। बसों की फिटनेस, परमिट, रूट, बस स्टैंड, ट्रैफिक व्यवस्था और यात्रियों की सुविधा जैसे कई पहलुओं को एक साथ व्यवस्थित करने की योजना है।

इस योजना के तहत अगले पांच साल में 14,981 बसों के संचालन का लक्ष्य रखा गया है। इन बसों के लिए 3,636 रूट निर्धारित किए गए हैं। अधिकारियों को यात्रियों की सुविधा और बसों के निर्बाध संचालन को प्राथमिकता देते हुए संबंधित विभागों के बीच समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। इस तरह मध्यप्रदेश में सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क के विस्तार के साथ बसों के संचालन से जुड़ी आधारभूत सुविधाओं को भी बेहतर बनाने की तैयारी की जा रही है।

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