ट्रम्प ने AI का नाम बदलकर सुपर इंटेलिजेंस किया, जिनपिंग की मौजूदगी में पिछले सप्ताह दिया था नाम
ट्रम्प ने AI के लिए नया नाम इस्तेमाल करने का आदेश दिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को व्हाइट हाउस में बड़ी टेक कंपनियों के CEO के साथ बैठक की। बैठक में AI की सुरक्षा और निगरानी को लेकर चर्चा हुई। इस दौरान गूगल, एंथ्रोपिक, मेटा, ओपनएआई, एक्स-एआई और एनवीडिया के CEO ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसी बैठक के दौरान ट्रम्प ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का नाम बदलकर सुपर इंटेलिजेंस करने वाले एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर भी हस्ताक्षर किए।
ट्रम्प ने कहा कि AI को आर्टिफिशियल यानी बनावटी कहना ठीक नहीं है। उनके मुताबिक यह इंटरनेट से भी बड़ी तकनीक है। उन्होंने कहा कि AI की दौड़ अब अमेरिका और चीन के बीच है और फिलहाल अमेरिका इस मुकाबले में आगे चल रहा है। ट्रम्प ने पिछले सप्ताह अमेरिकी महासभा में भी पहली बार AI को सुपर इंटेलिजेंस कहा था।
टेक कंपनियों के CEO के साथ बैठक
व्हाइट हाउस में हुई बैठक में टेक इंडस्ट्री की कई बड़ी कंपनियों के CEO शामिल हुए। बैठक में AI की सुरक्षा और निगरानी को लेकर समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। गूगल, एंथ्रोपिक, मेटा, ओपनएआई, एक्स-एआई और एनवीडिया के CEO इस समझौते में शामिल रहे। बैठक में AI के लिए जरूरी डेटा सेंटर और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी चर्चा हुई। ट्रम्प ने कहा कि जिन शहरों और कस्बों में डेटा सेंटर बनाए जाएंगे, वहां टेक कंपनियों को स्थानीय समुदाय के साथ मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कंपनियों से इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की मदद करने की भी बात कही।
इसमें स्कूलों, शिक्षकों और दूसरी स्थानीय जरूरतों के लिए आर्थिक मदद देने की संभावना का भी उल्लेख किया गया। ट्रम्प के मुताबिक डेटा सेंटर बनाने से पहले कंपनियों को स्थानीय समुदाय के साथ साझेदारी करनी चाहिए, ताकि इन परियोजनाओं का फायदा वहां रहने वाले लोगों को भी मिल सके।
डेटा सेंटर क्यों जरूरी हैं?
ट्रम्प ने AI के लिए डेटा सेंटर की जरूरत को भी समझाया। उन्होंने कहा कि जिन AI सिस्टम से सवाल पूछे जाते हैं, उनके पीछे हजारों और लाखों शक्तिशाली कंप्यूटर काम करते हैं। ये कंप्यूटर बड़े डेटा सेंटर में रखे जाते हैं। इसलिए AI के इस्तेमाल के बढ़ने के साथ डेटा सेंटर की जरूरत भी बढ़ेगी। ट्रम्प ने कहा कि AI का इस्तेमाल बढ़ने के साथ डेटा सेंटर का महत्व भी बढ़ेगा।
इस दौरान उन्होंने टेक कंपनियों से स्थानीय समुदाय के साथ मिलकर काम करने की बात कही। उनके अनुसार स्कूलों, शिक्षकों और अन्य स्थानीय जरूरतों के लिए आर्थिक सहायता भी ऐसे क्षेत्रों में दी जा सकती है। मेटा के CEO मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि व्हाइट हाउस के साथ हुए समझौते का मकसद लोगों का भरोसा बढ़ाना है। AI से जुड़े विकास के साथ उसकी सुरक्षा और निगरानी को लेकर भी चर्चा बढ़ रही है।
अमेरिका और चीन के बीच AI की दौड़
ट्रम्प ने कहा कि AI की दौड़ अब अमेरिका और चीन के बीच है। उन्होंने दावा किया कि फिलहाल अमेरिका इस मुकाबले में आगे चल रहा है। पिछले सप्ताह अमेरिकी महासभा में उन्होंने पहली बार AI को सुपर इंटेलिजेंस कहा था। अब एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए इस नाम को इस्तेमाल करने की दिशा में कदम उठाया गया है।
ट्रम्प के अनुसार AI को आर्टिफिशियल कहना सही नहीं है, क्योंकि यह तकनीक इंटरनेट से भी बड़ी हो सकती है। उनके बयान में AI को लेकर अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा का भी उल्लेख किया गया। इस पूरे बदलाव के दौरान टेक कंपनियों के साथ डेटा सेंटर और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी चर्चा हुई। ट्रम्प ने कहा कि इन परियोजनाओं में स्थानीय समुदाय की भागीदारी जरूरी होनी चाहिए और कंपनियों को वहां रहने वाले लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखना चाहिए।
टेक कंपनियों और स्थानीय समुदाय की साझेदारी
ट्रम्प ने कहा कि जिन शहरों और कस्बों में डेटा सेंटर बनाए जाएंगे, वहां टेक कंपनियों को स्थानीय समुदाय के साथ मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि कंपनियों को वहां रहने वाले लोगों की मदद करनी चाहिए। इसमें स्कूलों, शिक्षकों और अन्य स्थानीय जरूरतों के लिए आर्थिक सहायता शामिल हो सकती है।
उनके मुताबिक डेटा सेंटर बनाने से पहले कंपनियों को स्थानीय समुदाय के साथ साझेदारी करनी चाहिए, ताकि परियोजनाओं का फायदा सिर्फ कंपनियों तक सीमित न रहे बल्कि वहां रहने वाले लोगों को भी मिल सके।AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ बड़े डेटा सेंटर की जरूरत बढ़ने की बात भी बैठक में सामने आई। ट्रम्प ने बताया कि AI के पीछे हजारों-लाखों शक्तिशाली कंप्यूटर काम करते हैं और ये कंप्यूटर बड़े डेटा सेंटर में रखे जाते हैं। इसलिए AI के विस्तार के साथ डेटा सेंटर की जरूरत भी बढ़ेगी।
AI सुरक्षा समझौते पर भी हस्ताक्षर
व्हाइट हाउस की बैठक में AI की सुरक्षा और निगरानी से जुड़ा समझौता भी हुआ। इसमें गूगल, एंथ्रोपिक, मेटा, ओपनएआई, एक्स-एआई और एनवीडिया जैसी कंपनियों के CEO शामिल रहे। मेटा के CEO मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि व्हाइट हाउस के साथ हुए समझौते का उद्देश्य लोगों का भरोसा बढ़ाना है। इस बैठक और एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के साथ अमेरिका में AI को लेकर सरकारी शब्दावली में बदलाव की दिशा में कदम उठाया गया। ट्रम्प ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए नया नाम सुपर इंटेलिजेंस इस्तेमाल करने का आदेश दिया है। साथ ही उन्होंने AI के लिए जरूरी डेटा सेंटर और इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर भी अपनी प्राथमिकताओं को सामने रखा।
