एमपी जेल कर्मचारियों को 19 साल बाद सरकारी क्वार्टर का तोहफा, 38 जेलों में बनेंगे 244 नए 2 बीएचके फ्लैट
19 साल के लंबे इंतजार के बाद सरकारी आवास को मंजूरी
मध्य प्रदेश के जेल विभाग में तैनात प्रहरियों और मैदानी कर्मचारियों के लिए करीब 19 साल के लंबे इंतजार के बाद बड़ी राहत सामने आई है। राज्य शासन ने जेल कर्मचारियों के लिए नए सरकारी क्वार्टर बनाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत तथा चुस्त-दुरुस्त करने के उद्देश्य से सरकार ने 52 करोड़ 15 लाख रुपए से अधिक के बजट वाले हाउसिंग प्रोजेक्ट को प्रशासनिक मंजूरी दी है। इसके तहत प्रदेश की 38 जेलों में 244 नए फ्लैट बनाए जाएंगे।
यह योजना खास तौर पर उन जेल कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिन्हें सुरक्षा कारणों से जेल कैंपस के आसपास ही रहना पड़ता है। लंबे समय से कर्मचारियों की ओर से सरकारी आवास की समस्या उठाई जाती रही थी। विभाग में आवासों की कमी के कारण कई कर्मचारियों को जेल परिसर के आसपास किराए के मकानों में रहना पड़ता था। अब जेल कर्मचारियों के क्वार्टर बनाने की योजना के जरिए इस समस्या को काफी हद तक कम करने की कोशिश की जा रही है।
38 जेलों में बनाए जाएंगे 244 नए 2 बीएचके फ्लैट
मंजूर किए गए प्रोजेक्ट के तहत प्रदेश की 38 जेलों में 244 नए आवास तैयार किए जाएंगे। इनमें एच-टाइप यानी 2 बीएचके फ्लैट बनाए जाने हैं। परियोजना में पांच जिला जेल और 33 सब-जेल शामिल हैं। इन सभी आवासों के निर्माण की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग को सौंपी गई है।
यह योजना सभी जेलों में समान संख्या में आवास बनाने पर आधारित नहीं है। उपलब्ध जगह और आवश्यकता के हिसाब से अलग-अलग जेलों में अलग-अलग संख्या में फ्लैट बनाए जाएंगे। भोपाल संभाग के चार पड़ोसी जिलों को भी इस परियोजना का फायदा मिलेगा। जहां कुल 52 आवास बनाए जाने हैं, उनमें रायसेन में 28, सीहोर में 12 तथा विदिशा और राजगढ़ में 6-6 आवास शामिल हैं। सरकार की योजना के अनुसार ये आवास सिर्फ तत्काल जरूरत को पूरा करने के लिए नहीं हैं, बल्कि इनके डिजाइन में भविष्य की जरूरत का भी ध्यान रखा गया है।
जरूरत पड़ने पर बढ़ाई जा सकेंगी मंजिलें
जेल कर्मचारियों के क्वार्टर का डिजाइन इस तरह तैयार किया गया है कि भविष्य में जरूरत बढ़ने पर इन भवनों के ऊपर एक या दो अतिरिक्त मंजिलें बनाई जा सकें। जगह की उपलब्धता के हिसाब से 4, 8, 12 और 16 आवास वाले अलग-अलग ब्लॉक तैयार किए जाएंगे।
उदाहरण के तौर पर सिवनी जिला जेल में 16 घरों वाला सबसे बड़ा ब्लॉक बनाया जाएगा। वहीं सीहोर, देवास और गैरतगंज में 12-12 आवास वाले ब्लॉक तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा सीधी, श्योपुर, महिदपुर जैसी जगहों पर 8-8 घरों वाले ब्लॉक और गंजबासौदा तथा नरसिंहगढ़ जैसे स्थानों पर 4-4 आवास वाले ब्लॉक बनाए जाएंगे। इस डिजाइन का उद्देश्य यह है कि भविष्य में कर्मचारियों की संख्या बढ़ने या आवास की जरूरत बढ़ने पर मौजूदा संरचना को विस्तार दिया जा सके। यानी नए निर्माण के लिए हर बार पूरी तरह से अलग परियोजना तैयार करने की जरूरत न पड़े।
2004 से 2007 के बाद नहीं हुआ था नया निर्माण
जेल विभाग में सरकारी आवासों के निर्माण का काम लंबे समय से लगभग रुका हुआ था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 2004 से 2007 के बीच करीब 1200 क्वार्टर बनाए गए थे। इसके बाद विभाग में नए सरकारी आवासों का निर्माण नहीं हुआ। वर्तमान में जेल विभाग में करीब 8000 कर्मचारी पदस्थ हैं, जबकि करीब 4450 घरों की जरूरत बताई गई है। पुराने 1200 आवासों और अब बनाए जाने वाले 244 नए आवासों को जोड़ने के बाद भी कुल आवासों की संख्या करीब 4444 तक पहुंचेगी।
ऐसे में 3000 से अधिक कर्मचारियों को अभी भी किराए के मकानों में रहना पड़ेगा। यही वजह है कि 244 नए जेल कर्मचारियों के क्वार्टर बनने के बावजूद विभाग में सरकारी आवासों की समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं होगी। हालांकि लंबे अंतराल के बाद शुरू होने वाला यह निर्माण कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
सुरक्षा के कारण जेल कैंपस के पास रहना पड़ता है
जेल विभाग के कर्मचारियों के सामने सरकारी आवास की कमी सिर्फ सुविधा से जुड़ा विषय नहीं है। सुरक्षा व्यवस्था के कारण कई कर्मचारियों को जेल कैंपस के आसपास ही रहना पड़ता है। लेकिन सरकारी आवास उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में उन्हें आसपास किराए के मकानों में रहना पड़ता है, जिससे उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
जेल डीजी करुणा कपूर के विभिन्न जिलों के दौरे के दौरान कर्मचारियों ने भी यह समस्या उनके सामने रखी थी। कर्मचारियों का कहना था कि सुरक्षा कारणों के चलते उन्हें जेल कैंपस के पास रहना पड़ता है, लेकिन सरकारी घर नहीं होने से काफी परेशानी होती है। इसके बाद विभाग ने आवास निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से भी इस संबंध में घोषणा की गई थी। अब प्रशासनिक मंजूरी मिलने के बाद लंबे समय से लंबित आवास निर्माण की योजना आगे बढ़ सकेगी।
नए आवासों से कर्मचारियों को कितनी राहत मिलेगी
नए निर्माण के बाद जेल कर्मचारियों के क्वार्टर की संख्या में बढ़ोतरी होगी और अलग-अलग जेलों में तैनात कर्मचारियों को सरकारी आवास उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। हालांकि विभाग की कुल जरूरत और उपलब्ध आवासों के बीच अभी भी बड़ा अंतर बना हुआ है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार विभाग में करीब 8000 कर्मचारी पदस्थ हैं और 4450 आवासों की आवश्यकता है। पुराने आवासों तथा नए 244 फ्लैटों को जोड़ने पर भी उपलब्धता जरूरत से कम रहेगी। इसलिए यह परियोजना एक लंबे समय से चली आ रही समस्या को कम करने की दिशा में पहला बड़ा कदम है, लेकिन पूरी समस्या का समाधान अभी बाकी है। इस योजना के जरिए 19 साल बाद नए सरकारी आवास बनने की प्रक्रिया शुरू होगी। साथ ही अलग-अलग जेलों में बनाए जा रहे 2 बीएचके फ्लैट सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों के लिए रहने की सुविधा को बेहतर करने में मदद करेंगे।
