India-UK FTA Impact: ब्रिटेन से बल्क स्कॉच व्हिस्की का आयात 1,000% बढ़ा, टैरिफ में 50% कटौती
एफटीए लागू होते ही बल्क शिपमेंट्स में 1,000 फीसदी की रिकॉर्ड छलांग
भारत और यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) के बीच संपन्न हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के औपचारिक रूप से लागू होने के बाद भारतीय शराब उद्योग में बड़ा संरचनात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। देश में ब्रिटेन से आयात होने वाली बल्क स्कॉच व्हिस्की के आयात में अप्रत्याशित ऐतिहासिक उछाल दर्ज किया गया है।
वाणिज्य मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 के महीने में बल्क स्कॉच व्हिस्की का आयात सालाना (साल-दर-साल) आधार पर करीब 1,000 प्रतिशत बढ़कर 12.39 मिलियन डॉलर यानी लगभग 117 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। सीमा शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) में की गई भारी कटौती का सीधा लाभ उठाते हुए भारतीय बॉटलिंग कंपनियों और डिस्टिलरीज ने बड़े शिपमेंट्स मंगाने शुरू कर दिए हैं। इस प्रकार भारत-ब्रिटेन व्यापारिक संबंधों के नए दौर में बल्क स्कॉच व्हिस्की आयात देश के विदेशी व्यापार में सबसे तेजी से बढ़ता खंड बन गया है।
आयात शुल्क 150% से घटकर सीधे 75% हुआ
उल्लेखनीय है कि भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौता 15 जुलाई 2026 से दोनों देशों में प्रभावी रूप से लागू हुआ था। इस द्विपक्षीय समझौते के प्रावधानों के तहत ब्रिटेन से आने वाली अर्हताप्राप्त (एलिजिबल) स्कॉच व्हिस्की पर लगने वाले बुनियादी आयात शुल्क को 150 प्रतिशत की भारी दर से घटाकर सीधे 75 प्रतिशत कर दिया गया।
इस 50 प्रतिशत की भारी टैरिफ राहत के लागू होते ही बड़े कंटेनरों में आयात की बाढ़ आ गई। 2 लीटर से अधिक क्षमता वाले बड़े औद्योगिक कंटेनरों में आने वाली स्कॉच व्हिस्की का आयात वॉल्यूम के लिहाज से करीब 679 प्रतिशत बढ़कर 2.5 मिलियन यानी 25 लाख लीटर के उच्च स्तर पर पहुंच गया, जो ठीक एक साल पहले इसी अवधि में मात्र 3.20 लाख लीटर था। यह आंकड़े प्रमाणित करते हैं कि यह वृद्धि केवल डॉलर के मूल्य के कारण नहीं, बल्कि आयात की वास्तविक मात्रा में आए भारी विस्तार के कारण हुई है। इस बड़े नीतिगत बदलाव ने बल्क स्कॉच व्हिस्की आयात को बेहद आकर्षक और सस्ता बना दिया है।
छोटी बोतलों के आयात में 30% की गिरावट
बल्क शिपमेंट्स में आई इस तूफानी तेजी के विपरीत पूरी तरह पैक होकर आने वाली 2 लीटर या उससे कम क्षमता वाली कांच की बोतलों (तैयार बोतलबंद स्कॉच) के आयात में गिरावट दर्ज की गई है। अगस्त माह में इस तैयार श्रेणी का आयात सालाना आधार पर 30 प्रतिशत घटकर 3.08 मिलियन डॉलर (करीब 29 करोड़ रुपये) रह गया, जो पिछले वर्ष समान महीने में 4.39 मिलियन डॉलर (करीब 41 करोड़ रुपये) था। वहीं आयात का कुल वॉल्यूम भी 5,71,449 यूनिट्स से 30% गिरकर 4,02,507 यूनिट्स पर आ गया।
इससे स्पष्ट होता है कि टैरिफ कटौती का प्रारंभिक लाभ विदेशी ब्रांड्स की तैयार बोतलों के बजाय भारत में ही बॉटलिंग और ब्लेंडिंग करने वाले घरेलू उद्योगों को अधिक मिल रहा है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती 5 महीनों के दौरान बल्क स्कॉच व्हिस्की का कुल संचयी आयात पिछले साल की तुलना में 349 प्रतिशत बढ़ चुका है। इस प्रकार नए टैरिफ नियमों के तहत बल्क स्कॉच व्हिस्की आयात घरेलू विनिर्माण और स्थानीय रोजगार को भी नया संबल प्रदान कर रहा है।
