Gig Workers Social Security: कैब ड्राइवर और डिलीवरी बॉय को बीमा, ट्रांजेक्शन पर 2% सेस संभव
1.2 करोड़ गिग वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा का कानूनी ढांचा
देश में जोमैटो, स्विगी, ओला, उबर, ब्लिंकिट और अर्बन कंपनी जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए काम करने वाले करोड़ों डिलीवरी कर्मियों, कैब चालकों और स्वतंत्र सेवा प्रदाताओं के जीवन को सुरक्षित करने के लिए केंद्र सरकार एक युगांतरकारी कल्याणकारी योजना को अंतिम रूप दे रही है। वर्तमान में देश भर में 1.2 करोड़ से अधिक गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स कार्यरत हैं। किसी कंपनी या डिजिटल ऐप के लिए प्रोजेक्ट-आधारित, शॉर्ट टर्म या ऑन-डिमांड काम करने वाले इन श्रमिकों के पास अब तक किसी भी प्रकार की सामाजिक सुरक्षा नहीं थी।
केंद्र सरकार ने इनके अधिकारों के संरक्षण के लिए ‘नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड’ का विधिवत गठन कर दिया है। सरकार अब एग्रीगेटर कंपनियों के कुल वार्षिक टर्नओवर पर बोझ डालने के बजाय प्रत्येक ग्राहक ऑर्डर या कैब बुकिंग ट्रांजेक्शन पर 2 फीसदी की लेवी (सेस) लगाने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है। इस प्रकार गिग वर्कर्स सामाजिक सुरक्षा की यह महत्वाकांक्षी योजना देश के श्रम सुधारों में मील का पत्थर बनेगी।
वर्ष 2027 में लागू होगी योजना, पूरा खर्च उठाएंगी कंपनियां
श्रम मंत्रालय से जुड़े एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने पुष्टि की है कि इस कल्याणकारी योजना की रूपरेखा लगभग पूरी तरह तैयार हो चुकी है और इसे अगले साल यानी वर्ष 2027 में देश भर में अनिवार्य रूप से लागू कर दिया जाएगा। इसी नवंबर माह के दूसरे पखवाड़े में नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड की एक निर्णायक बैठक बुलाई गई है, जिसमें अंतिम ड्राफ्ट पर मुहर लगेगी।
योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि इसे संचालित करने वाले ‘सोशल सिक्योरिटी फंड’ का संपूर्ण वित्तीय भार केवल और केवल एग्रीगेटर कंपनियां ही वहन करेंगी। इसमें केंद्र सरकार या गरीब गिग वर्कर्स की जेब से कोई अंशदान (कंट्रीब्यूशन) नहीं लिया जाएगा। उद्योग जगत से हुई चर्चाओं के अनुसार, हरेक ऐप पर टर्नओवर तय करने के अलग-अलग तरीकों के कारण ही ट्रांजेक्शन-आधारित 2% लेवी पर सर्वसम्मति बनी है ताकि कोई एक सेगमेंट दूसरे को क्रॉस-सब्सिडी न दे। इस निष्पक्ष व्यवस्था के माध्यम से गिग वर्कर्स सामाजिक सुरक्षा का वित्तीय पोषण पूरी तरह सुनिश्चित रहेगा।
स्वास्थ्य, दुर्घटना और मातृत्व लाभ से मिलेगी सुरक्षा
प्रारंभिक चरण में इस सामाजिक सुरक्षा कवच के माध्यम से लाखों युवा डिलीवरी बॉयज और कैब ड्राइवर्स को व्यापक जीवन बीमा (लाइफ इंश्योरेंस), दिव्यांगता बीमा (डिसेबिलिटी कवर), कार्य के दौरान सड़क हादसे पर आकस्मिक दुर्घटना बीमा (एक्सीडेंट कवर), कैशलेस स्वास्थ्य सेवाएं और महिला कर्मियों को मातृत्व लाभ (मैटरनिटी बेनिफिट्स) सीधे उपलब्ध कराए जाएंगे। भविष्य निधि (PF) और वृद्धावस्था पेंशन जैसी दीर्घकालिक सुविधाओं को दूसरे चरण में जोड़ने की योजना है।
सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (Social Security Code) के प्रावधानों के अनुसार, इस योजना का पात्र बनने के लिए किसी गिग वर्कर को एक वित्तीय वर्ष के दौरान किसी एक प्लेटफॉर्म पर कम से कम 90 दिन या विभिन्न ऐप्स पर कुल मिलाकर 120 दिन काम करना अनिवार्य होगा। नीति आयोग के अनुमान के अनुसार, भारत में वर्ष 2020-21 में गिग वर्कर्स की संख्या 77 लाख थी, जो 2025-26 में 55 फीसदी बढ़कर 1.2 करोड़ पहुंच चुकी है और 2029-30 तक यह देश के कुल कार्यबल का 6.7 प्रतिशत यानी 2.35 करोड़ हो जाएगी, जिनका राष्ट्रीय जीडीपी में 2.25 लाख करोड़ रुपये का योगदान होगा। इस विशाल श्रमशक्ति को स्थायित्व देने के लिए गिग वर्कर्स सामाजिक सुरक्षा का यह कदम ऐतिहासिक सिद्ध होगा।
