जापान शेयर बाजार में भारी गिरावट: निक्केई 3.5% टूटा, तीन महीने के निचले स्तर पर

जापान शेयर बाजार गिरावट के बाद टोक्यो के कारोबारी कक्ष में चिंतित ब्रोकर

निक्केई सूचकांक में 3.56 प्रतिशत का भारी गोता

अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के शुरुआती रुझानों और नतीजों के सामने आते ही एशियाई बाजारों में सबसे भीषण मार जापानी शेयर बाजार पर पड़ी है। टोक्यो स्टॉक एक्सचेंज का 225 प्रमुख कंपनियों वाला बेंचमार्क सूचकांक ‘निक्केई’ (Nikkei 225) 3.56 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 60,835.36 अंक पर आ गया।

यह 29 जुलाई के बाद से निक्केई का पिछले तीन महीनों में सबसे निचला स्तर दर्ज किया गया है। केवल प्रमुख सूचकांक ही नहीं, बल्कि समूचे बाजार की व्यापक स्थिति को दर्शाने वाला ‘ब्रॉडर टॉपिक्स’ (Topix) इंडेक्स भी 2.45 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 3,831.27 अंक के स्तर पर आ गया। सुबह कारोबार खुलते ही आई इस आक्रामक जापान शेयर बाजार गिरावट ने निवेशकों के बीच घबराहट का माहौल पैदा कर दिया।

एआई और डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स पर कड़े नियमों की आशंका

जापान के शेयर बाजार में इस अचानक आई बिकवाली की मुख्य वजह अमेरिकी राजनीति में हुआ शक्ति संतुलन का बदलाव है। निवेशकों को आशंका है कि अमेरिकी कांग्रेस में डेमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत होने से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर और विशाल डेटा सेंटर परियोजनाओं को लेकर कड़े विनियामक नियम लागू किए जा सकते हैं।

डेमोक्रेट्स ऊर्जा की अत्यधिक खपत, पर्यावरण प्रदूषण और बिग टेक कंपनियों के एकाधिकार को लेकर पहले से ही सख्त रहे हैं। इस राजनीतिक बदलाव के चलते बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर किए जाने वाले अंधाधुंध पूंजीगत खर्च में भारी कटौती आ सकती है। चूंकि जापानी अर्थव्यवस्था में सेमीकंडक्टर सामग्री, चिप मैन्युफैक्चरिंग उपकरण और तकनीकी कंपोनेंट्स बनाने वाली कंपनियों की हिस्सेदारी बहुत बड़ी है, इसलिए जापान शेयर बाजार गिरावट में सबसे बड़ा नुकसान इन्हीं तकनीकी शेयरों को उठाना पड़ा है।

बैंकिंग, ऑटो और हेल्थकेयर सेक्टर पर भी चौतरफा दबाव

बाजार के जानकारों का कहना है कि डेमोक्रेट्स का प्रदर्शन उम्मीद से काफी बेहतर रहा है, जिससे अमेरिकी बाजार में व्यापारिक संरक्षणवाद और स्थानीय उत्पादन को प्राथमिकता देने वाली नीतियों की विस्तृत समीक्षा होगी। इस अनिश्चितता का नकारात्मक असर जापान के निर्यात-आधारित ऑटोमोबाइल उद्योग, फार्मास्यूटिकल हेल्थकेयर, वाणिज्यिक बैंकिंग और नई तकनीकों से जुड़े सेक्टर्स पर व्यापक रूप से पड़ा है। इसके साथ ही मुद्रा बाजार में जापानी येन के डॉलर के मुकाबले मजबूत होने से जापानी निर्यातकों के विदेशी मुनाफे पर भी कैंची चलने की आशंका बढ़ गई है। इन सभी वैश्विक और मौद्रिक दबावों के संयुक्त प्रभाव से जापान शेयर बाजार गिरावट ने पूरे एशियाई व्यापारिक परिदृश्य को रक्षात्मक मुद्रा में धकेल दिया है।

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