चावल के दामों में भारी उछाल: टूटा चावल भी महंगा, सरकार ने एथेनॉल उत्पादन पर लगाई कैपिंग

टूटे चावल की कीमतें बढ़ने के बाद अनाज मंडी में चावल के नमूनों की जांच करते व्यापारी

चावल की महंगाई पर सरकार का सख्त कदम

देश के खुदरा और थोक बाजारों में लगातार महंगे होते चावल के दामों ने केंद्र सरकार की चिंताएं बढ़ा दी हैं। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सरकार ने अब भारतीय खाद्य निगम (FCI) के अतिरिक्त (सरप्लस) चावल से बनने वाले एथेनॉल की अधिकतम ऊपरी सीमा यानी कैपिंग तय कर दी है।

इससे पहले चीनी की घरेलू कीमतों में तेज उछाल को देखते हुए सरकार ने गन्ने के सीधे रस और बी-हेवी शीरे से एथेनॉल बनाने पर सख्त पाबंदियां लगाई थीं। अब खुले बाजार में शत-प्रतिशत टूटे हुए चावल (100% Broken Rice) के भावों में भी भारी तेजी दर्ज की जा रही है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार जल्द ही टूटे चावल के अंतरराष्ट्रीय निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध भी लगा सकती है, क्योंकि इस खरीफ सत्र में धान का कुल उत्पादन घटने की प्रारंभिक रिपोर्टें आई हैं। इस प्रकार टूटे चावल की कीमतें सीधे तौर पर खाद्य सुरक्षा नीति को प्रभावित कर रही हैं।

3.24 अरब लीटर से अधिक नहीं बनेगा एथेनॉल

पेट्रोल में एथेनॉल के 20 प्रतिशत मिश्रण (E20) के लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार हर साल तेल विपणन कंपनियों की ओर से टेंडर जारी करती है। सरकार की ओर से 3 नवंबर 2026 को जारी संशोधित टेंडर शर्तों (रिवाइज्ड टेंडर कंडीशंस) में स्पष्ट किया गया है कि इस चालू वर्ष की शुरुआती तीन तिमाहियों के दौरान एफसीआई के सरप्लस चावल से 3.24 अरब लीटर से अधिक एथेनॉल किसी भी हाल में नहीं बनाया जा सकता है।

भारत में गन्ने के रस के अलावा मक्का और मुख्य रूप से टूटे चावल का ही उपयोग बायोफ्यूल बनाने में होता है। लेकिन धान के रकबे में कमी और अंतरराष्ट्रीय मांग के चलते आपूर्ति चक्र बाधित हुआ है। केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2 नवंबर 2026 को देश में चावल की औसत थोक कीमत 4,380.49 रुपये प्रति क्विंटल यानी करीब 44 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई। यह एक साल पहले समान तारीख को 3,747.44 रुपये प्रति क्विंटल थी, यानी एक ही साल में चावल के थोक दाम करीब 17 फीसदी बढ़ चुके हैं। इस स्थिति के बीच टूटे चावल की कीमतें बाजार का संतुलन बिगाड़ रही हैं।

टूटे चावल का भाव 3,036 रुपये प्रति क्विंटल पहुंचा

उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों से यह स्पष्ट हुआ है कि बीते मात्र एक पखवाड़े (15 दिन) के भीतर ही टूटे चावल के दामों में 5 प्रतिशत से भी अधिक का तेज उछाल दर्ज किया गया है। पिछले महीने 10 अक्टूबर को देश भर में ब्रोकन राइस की औसत थोक कीमत 2,883 रुपये प्रति क्विंटल थी, जो 2 नवंबर 2026 को तेजी से उछलकर 3,036 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर तक जा पहुंची।

खुदरा दुकानों पर तो पैकेज्ड और खुले चावल के दाम थोक की तुलना में कहीं अधिक महंगे बिक रहे हैं। पोल्ट्री उद्योग और पशु आहार निर्माता भी सस्ते टूटे चावल पर निर्भर रहते हैं, जिसकी कीमतें बढ़ने से संपूर्ण खाद्य आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ रहा है। इसे देखते हुए वाणिज्य मंत्रालय आने वाले दिनों में टूटे चावल के विदेशों में जाने वाले गैर-बासमती शिपमेंट्स को पूरी तरह रोकने का विधिक आदेश जारी कर सकता है। इस प्रकार अनियंत्रित टूटे चावल की कीमतें घरेलू खाद्य प्रबंधन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी हैं।

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