US Debt Crisis: अमेरिका पर 1 महीने में चढ़ा 422 अरब डॉलर कर्ज, पाकिस्तान की कुल GDP के बराबर

अमेरिकी राष्ट्रीय कर्ज के बढ़ते आंकड़े और डॉलर की कमजोर होती क्रय शक्ति का तुलनात्मक ग्राफ

1 महीने में 422 अरब डॉलर की विशालकाय कर्ज वृद्धि

दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे समृद्ध अर्थव्यवस्था वाले देश संयुक्त राज्य अमेरिका का संप्रभु कर्ज नियंत्रण से बाहर होकर ऐतिहासिक विस्फोटक स्थिति में पहुंच चुका है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा जारी ताजा वित्तीय ब्योरे के अनुसार, अकेले अक्टूबर के महीने में ही अमेरिकी फेडरल सरकार का शुद्ध कर्ज 422 अरब डॉलर बढ़कर 40.6 ट्रिलियन डॉलर के सर्वकालिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।

इस आंकड़े का भयावह पहलू यह है कि अमेरिका ने केवल एक माह में जितना नया कर्ज लिया है, वह दक्षिण एशियाई देश पाकिस्तान की संपूर्ण वार्षिक अर्थव्यवस्था के कुल आकार के बराबर है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान की कुल जीडीपी का आकार वर्ष 2025 में 407 अरब डॉलर था, जिसके इस साल करीब 450 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। लगातार बेकाबू होता यह अमेरिकी राष्ट्रीय कर्ज वैश्विक मुद्रा व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा जोखिम बनता जा रहा है।

रोजाना 10 अरब डॉलर की रफ्तार से बढ़ रहा है कर्ज का बोझ

आधिकारिक आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि चालू वर्ष के जुलाई माह से लेकर अब तक यानी मात्र तीन महीनों के भीतर अमेरिकी सरकार का कुल कर्ज 1.2 ट्रिलियन डॉलर बढ़ चुका है। इसका सीधा गणित यह है कि इस अवधि के दौरान अमेरिकी राजकोष पर हर महीने औसतन 300 अरब डॉलर और प्रतिदिन करीब 10 अरब डॉलर का नया कर्ज जुड़ रहा है।

इस अंधाधुंध उधारी के कारण अमेरिका का ‘कर्ज से जीडीपी अनुपात’ (Debt-to-GDP Ratio) बढ़कर 123 प्रतिशत के खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के चरम संकट के बाद यह अब तक का सबसे ऊंचा कर्ज अनुपात है। भारी वित्तीय घाटे की भरपाई के लिए लिया जा रहा यह अमेरिकी राष्ट्रीय कर्ज भविष्य के लिए गंभीर राजकोषीय संकट की चेतावनी दे रहा है।

मैच्योर होते पुराने बॉन्ड्स को चुकाने के लिए नए कर्ज की नीलामी

इस भीषण कर्ज संकट से निपटने और पुराने दायित्वों को पूरा करने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने पिछले सप्ताह ही ट्रेजरी बिल्स और नोट्स की रिकॉर्ड नीलामी करके 839 अरब डॉलर का विशाल फंड बाजार से जुटाया है। हालांकि, इस जुटाई गई भारी राशि का अधिकांश हिस्सा उन पुराने ट्रेजरी बिलों के भुगतान में खर्च हो जाएगा, जिनकी मैच्योरिटी अवधि पूरी हो चुकी है। यानी पुराने कर्ज को चुकाने के लिए नया बड़ा कर्ज लिया जा रहा है।

इससे पहले वर्ष 2025 में भी ट्रेजरी ने समान अवधि में 834 अरब डॉलर जुटाए थे। ऐतिहासिक दृष्टिकोण से देखें तो अमेरिका का कुल कर्ज वर्ष 1990 में मात्र 3.2 ट्रिलियन डॉलर था, जो 2000 में 5.7 ट्रिलियन, 2010 में 13.6 ट्रिलियन, 2020 में 27 ट्रिलियन और अब 2026 में 40.6 ट्रिलियन डॉलर के पार जा चुका है। यदि इस पर शीघ्र अंकुश नहीं लगा, तो अमेरिकी राष्ट्रीय कर्ज का यह बुलबुला वैश्विक बैंकिंग प्रणाली को गहरी मंदी में धकेल सकता है।

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