इतिहास की सबसे बड़ी क्रिप्टो हैकिंग: बाइनेंस से 60,000 करोड़ चोरी, नॉर्थ कोरिया पर शक
6.3 बिलियन डॉलर की अभूतपूर्व डिजिटल लूट से हड़कंप
वैश्विक क्रिप्टोकरेंसी उद्योग के इतिहास में अब तक की सबसे भयानक और विशालकाय साइबर सेंधमारी सामने आई है। दुनिया के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित क्रिप्टो एक्सचेंज बाइनेंस (Binance) के मुख्य सुरक्षा तंत्र को हैकर्स ने पूरी तरह भेद दिया है। इस अंतरराष्ट्रीय साइबर हमले में करीब 6.3 बिलियन डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में लगभग 60 हजार करोड़ रुपये मूल्य की विभिन्न क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल कॉइन्स चुरा लिए गए हैं।
इस विशाल लूट का पता चलते ही वैश्विक बाजारों में हाहाकार मच गया और बिटकॉइन (Bitcoin) सहित प्रमुख क्रिप्टोकरेंसीज के भाव में 5 प्रतिशत से भी अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई। बाइनेंस प्रबंधन ने आपातकालीन कदम उठाते हुए ग्राहकों के खातों से सभी प्रकार के क्रिप्टो फंड्स के जमा (डिपॉजिट) और निकासी (विड्रॉल) पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। इस स्तब्ध करने वाली क्रिप्टो हैकिंग बाइनेंस ने डिजिटल संपत्तियों की सुरक्षा पर सबसे बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।
टीआरएम लैब्स का दावा: हमले के पीछे उत्तर कोरियाई हैकर्स
वैश्विक ब्लॉकचेन फॉरेंसिक एवं रिसर्च फर्म ‘टीआरएम लैब्स’ (TRM Labs) ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में सनसनीखेज दावा किया है कि इस ऐतिहासिक हैकिंग के पीछे उत्तर कोरिया (North Korea) के कुख्यात सरकार समर्थित हैकर समूहों का हाथ है। इससे पहले वर्ष 2025 में दुबई स्थित क्रिप्टो एक्सचेंज ‘बायबिट’ से उत्तर कोरियाई हैकर्स ने 1.5 बिलियन डॉलर की चोरी की थी, जो उस समय तक की सबसे बड़ी घटना मानी जा रही थी।
लेकिन बाइनेंस में हुई यह ताजा डकैती बायबिट की घटना से लगभग चार गुना अधिक बड़ी और विनाशकारी है। बाइनेंस की प्रारंभिक तकनीकी जांच में सामने आया है कि हैकरों ने संभवतः कंपनी के एक वरिष्ठ डेवलपर इंजीनियर के लैपटॉप में मैलवेयर के जरिए सेंध लगाई और वहां से प्राइवेट कीज व डिजिटल लॉकर के एक्सेस कोड हासिल कर इस विशाल वारदात को अंजाम दिया। इस खुलासे के बाद क्रिप्टो हैकिंग बाइनेंस की जांच में कई देशों की सुरक्षा एजेंसियां जुट गई हैं।
30 करोड़ यूजर्स प्रभावित, भारतीय निवेशकों पर भी मंडराया साया
वर्तमान समय में दुनिया के 100 से अधिक देशों में बाइनेंस के 30 करोड़ से ज्यादा पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं, जिनमें अकेले भारत से 2 से 2.5 करोड़ निवेशकों के जुड़े होने का अनुमान है। हालांकि, बाइनेंस ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि व्यक्तिगत रूप से कितने खुदरा उपयोगकर्ताओं के वॉलेट्स से फंड खाली किए गए हैं।
कंपनी ने आधिकारिक बयान जारी कर दुनिया भर के ग्राहकों को आश्वस्त करने का प्रयास किया है कि उनका धन ‘सिक्योर एसेट फंड फॉर यूजर्स’ (SAFU) के तहत सुरक्षित है और यदि जांच में किसी आम उपभोक्ता का प्रत्यक्ष नुकसान साबित होता है, तो कंपनी अपने आरक्षित कोष से उसकी शत-प्रतिशत भरपाई करेगी। बाइनेंस की तकनीकी साइबर टीमें अंतरराष्ट्रीय पुलिस एजेंसियों और शीर्ष एथिकल हैकर्स के साथ मिलकर चोरी की गई क्रिप्टोकरेंसी के ऑन-चेन मूवमेंट को ट्रैक करने और चोरों के निकासी रास्तों को ब्लॉक करने में जुटी हैं। बहरहाल, क्रिप्टो हैकिंग बाइनेंस ने वैश्विक स्तर पर वित्तीय नियामकों को सकते में डाल दिया है।
