कच्चे तेल की कीमत: कच्चा तेल 100 डॉलर के पार, अमेरिका-ईरान तनाव का असर; पेट्रोल-डीजल महंगा होने की आशंका
कच्चा तेल 100 डॉलर के पार पहुंचा
नई दिल्ली। कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। 9 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड के दामों में 2.25 डॉलर का इजाफा हुआ। इसकी वजह अमेरिका-ईरान के बीच फिर बढ़ता तनाव बताया जा रहा है। इस बढ़ोतरी के पहले क्रूड की कीमत 98 डॉलर प्रति बैरल थी। इससे पहले 24 जुलाई को क्रूड का दाम 100 डॉलर प्रति बैरल पहुंचा था। छह हफ्ते के बाद कच्चे तेल की कीमत एक बार फिर इस स्तर के पार पहुंची है। अगर तेल के दाम इसी तरह बढ़ते रहे तो इससे पेट्रोल-डीजल और LPG के दाम बढ़ सकते हैं। इसका असर आम लोगों के साथ-साथ परिवहन, उद्योग और दूसरे क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है।
अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ा तेल बाजार का दबाव
कच्चे तेल की कीमत में इस ताजा उछाल की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुई नई सैन्य झड़पें बताई जा रही हैं। यूएस सेंट्रल कमांड ने मंगलवार देर रात बयान जारी कर बताया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के पांच तेल टैंकरों को नष्ट कर दिया। अमेरिका का दावा है कि उसने यह कार्रवाई ईरान के इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स द्वारा अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत पर बैलिस्टिक मिसाइल से किए गए हमले के जवाब में की है। इस घटनाक्रम ने पहले से तनावग्रस्त तेल बाजार में चिंता बढ़ाई है। तेल बाजार में किसी बड़े उत्पादक या महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से जुड़ा संकट वैश्विक आपूर्ति पर असर डाल सकता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
क्रूड ऑयल बढ़ने की सबसे बड़ी वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना बताया गया है। यह करीब 167 किलोमीटर लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान युद्ध के कारण यह रूट अब सुरक्षित नहीं रहा है। खतरे को देखते हुए कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहा है। दुनिया के कुल पेट्रोलियम का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी मार्ग पर निर्भर हैं। भारत अपनी जरूरत का करीब 50 प्रतिशत कच्चा तेल और 54 प्रतिशत LNG इसी रास्ते से मंगाता है। ऐसे में इस समुद्री मार्ग में लंबे समय तक बाधा रहने पर भारत सहित कई देशों के ऊर्जा बाजार पर असर पड़ सकता है।
पेट्रोल-डीजल और LPG पर पड़ सकता है असर
तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर ऊर्जा लागत पर पड़ सकता है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बना रहता है तो पेट्रोल-डीजल और LPG की कीमतों पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रूड कीमतों में लगातार बढ़ोतरी आयात बिल और घरेलू ऊर्जा लागत को प्रभावित कर सकती है। फिलहाल बाजार की नजर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति पर है। कच्चे तेल की कीमत आगे किस दिशा में जाएगी, यह काफी हद तक इस संकट की अवधि और वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ने वाले असर पर निर्भर करेगा।

