ITR में बैंक ब्याज छिपाने पर 200% जुर्माना: ITAT ने दी टैक्सपेयर को बड़ी राहत, जानें कानूनी नियम

आईटीआर बैंक ब्याज जुर्माना रद्द होने के बाद आईटीएटी के आदेश का अवलोकन करता करदाता

बैंक ब्याज छिपाने पर कर विभाग ने लगाया 200% का भारी जुर्माना

इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करते समय यदि आपने अपने बचत या सावधि बैंक खातों में जमा रकम पर मिले ब्याज की सटीक जानकारी जानबूझकर या अनजाने में छोड़ दी है, तो आपको भारी कानूनी परेशानी और जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। ऐसा ही एक गंभीर मामला दिल्ली के एक नौकरीपेशा करदाता के साथ सामने आया, जिसे कर विभाग की ओर से 3 लाख रुपये से अधिक का भारी-भरकम पेनल्टी नोटिस थमा दिया गया।

हालांकि, जब यह मामला आयकर अपीलीय अधिकरण (ITAT) की दिल्ली पीठ के समक्ष पहुंचा, तो वहां करदाता को बड़ी विधिक राहत मिली। यह विवाद ‘सिद्धार्थ गुप्ता बनाम इनकम टैक्स ऑफिसर’ के रूप में चर्चित हुआ है। इस मामले ने करदाताओं को आगाह किया है कि आईटीआर बैंक ब्याज जुर्माना का प्रावधान किसी भी समय उनकी वित्तीय योजनाओं को बिगाड़ सकता है।

कार खरीद और इनसाइट पोर्टल से खुला ब्याज का राज

मामले के अनुसार, सिद्धार्थ गुप्ता ने असेसमेंट ईयर 2020-21 के लिए 16 अक्टूबर 2020 को अपना मूल आयकर रिटर्न दाखिल किया था, जिसमें उन्होंने अपनी कुल वार्षिक आय 81.35 लाख रुपये घोषित की थी। बाद में आयकर विभाग के आधुनिक ‘इनसाइट पोर्टल’ पर डेटा मिलान के दौरान विभाग को उनके बैंक ब्याज और नई कार खरीदने से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जानकारी प्राप्त हुई। इसके आधार पर कर निर्धारण अधिकारी ने आयकर अधिनियम की धारा 147 के तहत उनका पुराना टैक्स असेसमेंट दोबारा री-ओपन कर दिया और 31 मार्च 2024 को धारा 148 के तहत नोटिस जारी किया।

नोटिस के जवाब में करदाता ने 24 अप्रैल 2024 को नया संशोधित रिटर्न दाखिल कर अपनी कुल आय बढ़ाकर 85.84 लाख रुपये दिखाई, यानी छूटे हुए 4.49 लाख रुपये के बैंक ब्याज को स्वीकार कर टैक्स भर दिया। असेसिंग ऑफिसर ने इस आय को स्वीकार तो कर लिया, लेकिन मूल रिटर्न में जानकारी छिपाने के आरोप में धारा 270A के तहत टैक्स की रकम का 200 फीसदी यानी कुल 3.08 लाख रुपये का भारी जुर्माना ठोक दिया। इस प्रकार करदाता सीधे तौर पर आईटीआर बैंक ब्याज जुर्माना के शिकंजे में फंस गया।

आईटीएटी ने क्यों रद्द किया 3.08 लाख का जुर्माना?

कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स (अपील) द्वारा राहत न मिलने पर करदाता ने आईटीएटी (ITAT) दिल्ली बेंच में अपील की। अधिकरण ने दोनों पक्षों के साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद 3.08 लाख रुपये के पूरे जुर्माने को पूरी तरह रद्द कर दिया। अधिकरण ने फैसला सुनाते हुए दो प्रमुख कानूनी वजहें बताईं।

पहली वजह यह रही कि आयकर विभाग द्वारा जारी किए गए पेनल्टी नोटिस में यह स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया था कि करदाता ने धारा 270A के तहत ‘अंडर-रिपोर्टिंग’ की है या ‘मिस-रिपोर्टिंग’ की है, यानी गलती की सटीक श्रेणी तय नहीं थी। ट्रिब्यूनल ने दिल्ली हाईकोर्ट के ‘श्नाइडर इलेक्ट्रिक’ मामले के पूर्व निर्णय का हवाला दिया कि अस्पष्ट नोटिस के आधार पर जुर्माना नहीं लगाया जा सकता। अधिकरण ने राहत जरूर दी, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसी तकनीकी गलतियों से बचने के लिए करदाताओं को हर हाल में अपने एआईएस (AIS) और 26AS से बैंक ब्याज का सटीक मिलान करके ही रिटर्न भरना चाहिए ताकि वे आईटीआर बैंक ब्याज जुर्माना से पूरी तरह सुरक्षित रह सकें।

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